1.12.16

दिमाग को धारदार बनाती है शंखपुष्पी


शंखपुष्पी के गुण:-
यह दस्तावर , मेघा के लिए हितकारी , वीर्य वर्धक , मानसिक दौर्बल्य को नष्ट करने वाली , रसायन (chemical) ,कसैली , गर्म , तथा स्मरण शक्ति (memory power), कान्ति बल और अग्नि को बढाने वाली एवम दोष , अपस्मार , भूत , दरिद्रता , कुष्ट , कृमि तथा विष को नष्ट करने वाली होती है l यह स्वर को उत्तम करने वाली (increase the sweetness in voice), मंगलकारी , अवस्था स्थापक तथा मानसिक रोगों को नष्ट (destroying the mental problems) करने वाली होती है l
परिचय : —-मनुष्य के मस्तिष्क पर प्रमुख क्रिया करने वाली यह वनस्पति दिमागी ताकत और याददाश्त को बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध है l
फूलों के भेद से यह तीन प्रकार की होती है (1) सफ़ेद फूल वाली (2) लाल फूल (red flowers) वाली और (3) नीले फूल वाली l तीनों के गुण एक सामान है l यह बेलों के रूप में जमीं पर फैली हुई होती है और एक हाथ से ऊँची नहीं होती l यह सारे भारत में पैदा होती है |
दिमाग को धारदार बनाती है शंखपुष्पी:–प्राय: छात्र -छात्राओं के पत्रों में दिमागी ताकत और स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए गुणकारी ओषधि बताने का अनुरोध पढने को मिलता रहता है l छात्र- छात्रओं के अलावा ज्यदा दिमागी एक्ससी काम करने वाले सभी लोगों के लिए शंखपुष्पी का सेवन अत्यन्त गुणकारी सिद्ध हुआ है l
इसका महीन पिसा हुआ चूर्ण , एक-एक चम्मच सुबह- शाम , मीठे दूध के साथ या मिश्री की चाशनी के साथ सेवन करना चाहिए l
 शुक्रमेह :—-शंखपुष्पी का महीन चूर्ण एक चम्मच और पीसी हुई काली मिर्च (black pepper powder) आधी चम्मच दोनों को मिला कर पानीके साथ फाकने से शुक्रमेह रोग ठीक होता है l
(3) ज्वर में प्रलाप :—तेज बुखार के कारण कुछ रोगी मानसिक नियंत्रण खो देते है और अनाप सनाप बकने लगते है l एसी स्थितिमें शंखपुष्पी और मिश्री को बराबर वजन में मिलाकर एक-एक चम्मच दिन में तीन या चार बार पानी के साथ देने से लाभहोता है और नींद भी अच्छी आती है l
 उच्च रक्तचाप :–उच्च रक्तचाप के रोगी ] को शंखपुष्पी का काढ़ा बना कर सुबह और शाम पीना चाहिए l दो कप पानी में दो चम्मच चूर्ण डालकर उबालें जब आधा कप रह जाए उतारकर ठंडा करके छान लें l यही काढ़ा है l दो या तीन दिन तक पियें उसके बाद एक-एक चम्मच पानी के साथ लेना शुरू कर दें रक्तचाप सामान्य होने तक लेतें रहें l
 बिस्तर में पेशाब :—-कुछ बच्चे बड़े हो जाने पर भी सोते हुए बिस्तर में पेशाब करने की आदत (habit) नहीं छोड़ते l एसे बच्चों को आधा चम्मच चूर्ण शहदमें मिलाकर सुबह शाम चटा कर ऊपर से ठंडा दूध या पानी पिलाना चाहिए l यह प्रयोग लगातार एक महीनें तक करें l

25.11.16

घर से चूहे भगाने के कारगर तरीके



अधिकांश घरों में आजकल चूहे देखने को मिल ही जाते हैं. आजकल चूहों की समस्या होने एक आम बात है. लेकिन घर में चूहों के पनपने के कारण कई बार अनाज के साथ ही कपड़ों और अन्य मूल्यवान चीजों का नुकसान होने लगता है. आम तौर पर चूहे झूठे छोड़े गए खाद्य पदार्थों, अनाज, चावल इत्यादि खा कर जीवित रहते हैं.चूहे खुद को आस पास के वातावरण के अनुकूल बनाने में माहिर होते हैं. घर मे चूहे होने के कारण घर में तो नुकसान होता ही है साथ ही इनसे अनेक बीमारियों का खतरा भी रहता है. जिसमे सबसे खतरनाक संक्रामक रोग है रबिस. इस बीमारी से अनेक लोगो को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
इस समस्या को दूर करने के लिए लोग बाजार में मिलने वाली अनेक दवाओं का प्रयोग करते हैं. लेकिन इन दवाओं का कभी घर में खतरा भी हो सकता है इस समस्या के समाधान के लिए आप कुछ घरेलु उपायों की मदद ले सकते हैं. यह घरेलू उपाय अत्यन्त सरल तथा लाभदायक होते हैं.
पुदीना का उपयोग
 
यदि चूहे ने घर में बिल बन लिया हो तो उसके लिए पुदीने का प्रयोग करना लाभदायक होता है. चूहे पुदीना की गंध बर्दाश्त नहीं कर पाते. इसके लिए आप पुदीना तेल में कपास का टुकड़ा डुबाकर उनके बिल के पास रख दें. इससे चूहे घर से भाग जायेंगे.
बाल का प्रयोग
घर में चूहे होने के कारण घर में आतंक मचा रहता है. जिसके कारण हमें अनेक समस्या का सामना करना पड़ता है. इस समयसा को दूर करने के लिए बालों का प्रयोग करना चाहिए. चूहे मानव बाल की दृष्टि बर्दाश्त नहीं कर सकते और अनेक बार चूहे बाल निगल लेते हैं जिसके कारण चूहे घर से भाग जाते हैं
बिल्ली पालें
घर में चूहे होने के कारण हमें अनेक समस्याएं होने लगती हैं. इस परेशानी से निपटने के लिए बिल्ली को घर में पाल लें. घर में बिल्ली को पालने से घर में चूहे समाप्त हो जाते हैं. बिल्ली चूहों की प्राकृतिक दुश्मन होती है. जहाँ बिल्लियाँ होगी वहां चूहों के होने का खतरा नहीं रहता.
पिपरमिन्ट का प्रयोग -
पिपरमिन्ट को आमतौर पर पुदीना कहा जाता है. पुदीने के कुछ फूल या पत्तियों को लें. अब इन पत्तियों को कूटकर घर के दरवाजे में रख दे. कुछ दिन इस विधि का प्रयोग करे. घर से भाग जाते हैं. 
चूहा जाल का प्रयोग
चूहे को कैद करने का जाल बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाता है. चूहों की समस्या होने पर आप एक चूहा जाल खरीद लें. अब इस जाल में कोई रोटी या अन्य खाद्य समग्री का टुकड़ा रखें. जब भी चूहा इस टुकड़े को खाने जायेगा तो उस जाल में फस जायेगा. अब इस फसे हुए चूहे को घर से कहीं दूर फेक दें, ताकि वह दुबारा घर में ना आ सके.

बालों के झड़ने और गंजेपन के रामबाण नुस्खे




बालों के गिरने -झड़ने और टूटन की सबसे बड़ी वजह होती है तनाव यह माना जाता है की तनाव के कारण हमारे बालो का बढ़ने का चक्र रुक जाता है अगर हमारा तनाव बढ़ जाता है तो बालों का बढ़ना तो रुक ही जाता है |एवं बालो का गिरना या टूटना शुरू हो जाता है इसलिए यदि हम बालों को तेजी से बढ़ाना चाहते है तो हमे चाहिए कि हम तनाव से दूर रहे ओर हमेशा प्रसन्न रहने की कोशिस करे|

 आजकल की भागदौड़ और व्यस्त  लाइफस्‍टाइल की वजह से आखिर कितनी ऐसी औरते हैं , जो अपने बालों को लंबा करने की सोंच सकती हैं? लंबे बाल पाने के लिये खान-पान और उनकी केयर करने की आवश्‍यकता होती है, जो कि हर किसी के बस की बात नहीं होती। लेकिन अगर आप हमारे बताए गए इन तरीको को आजमाएंगी तो आपके भी बाल लंबे और घने हो सकते हैं।
बालो के बढ़ने की गति हमारी खानपान की आदतों ,बालों की देख भाल  और बहुत से अन्य कारणों पर निर्भर करती है |आज हम आपके लिए कुछ उपाय लेकर आये है जिनका प्रयोग करके आपके बाल तेजी से बढ़ने लगेंगे तो आइये जानते है उन उपायो के बारे मे जिनका प्रयोग करके आपके बाल घने काले और तेजी से बढ़ने लग जायेंगे # 
*बालों में तेल लगाएं अगर बाल बढाना है तो उसमें तेल लगाना होगा। बालों में तकरीबन 1 घंटे के लिये तेल लगा रहने दें जिससे बालों की जड़ तेल को पूरी तरह से सोख ले। सिर पर हल्‍के गरम तेल से मालिश करें और गरम पानी में डुबोई हुई तौलिये से सिर ढंक कर भाप लें। # 
*नीम और बेर के पत्तो को  पानी के साथ पीसकर सिर पर लगा ले और इसके 3 घण्टो के बाद सिर को पानी से धो ले इसके प्रयोग से बालों का झड़ना कुछ ही दिनों में बन्द हो जायेगा और आपके बाल लम्बे भी होंगे #
* बादाम का तेल :-जल्‍दी बाल बढाने के लिये कोई भी तेल कारगर नहीं होता। इसके लिये सबसे अच्‍छा तेल बादाम का होता है। बादाम के तेल में विटामिन इ भारी मात्रा में पाया जाता है। 
* रोजाना धुलाई :-जिस तरह से बालों में तेल लगाना जरुरी है उसी तरह से बालों की सफाई और धुलाई भी बहुत जरुरी है। अगर आपके बाल लंबे हैं तो उन्‍हें हफ्ते में दो बार जरुर धोएं। आपके सिर की सफाई बहुत जरुरी है जिससे जड़ों को सांस लेने की जगह मिल सके।  
*सीताफल के बीज और बेर के पत्तो को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह से पीसकर बालों की जड़ो पर लगा ले और कुछ समय के अड़ अपने बालों को धो ले कुछ ही दिनों में आपको इसका असर देखने को मिलेगा 
* 250 ग्राम अमरबेल को ले और साथ में 3 लीटर पानी भी ले इस 3 लीटर पानी में अमरबेल को उबाले जब यह पानी उबलकर आधा रह जाए तो इसे आग से उतार ले और अपने बालों को इस पानी से धोये आपके बाल लम्बे होने लग जायेंगे 
* नीम ,मेहँदी और ग्रीन टी आदि  ऐसे हर्ब्स है जिनको बालो पर लगाने से बाल काले, घने और लम्बे होते है इन सब में मेहँदी सबसे अच्छी है क्योकि यह बालों की जड़ो को पोषण देती है और इसके प्रयोग से बाल काले ,घने और चमकदार बनते है|

22.11.16

नारियल तेल और बेकिंग सोडा का ये प्रयोग आपको बना देगा 10 साल जवां

|स्वच्छ, सुंदर त्वचा हर औरत का सपना होता है। और इस के लिए बाज़ार में कैमिकल युक्त फेशिअल क्रीमो की भरमार है | जिस से बहुत सारे साइड इफैक्ट हो सकते हैं इसी लिए आज हम आप के लिए एक ऐसा फेशिअल पैक लेकर आये हैं जो आपकी त्वचा को 10 साल तक जवां बना देगा | इसमें केवल दो घरेलु समग्रिओं का उपयोग होता जो हैं बेकिंग सोडा और नारियल का तेल आप इस प्राकृतिक फेस क्लीनर का नियमित रूप से उपयोग करते हैं, तो आप आसानी से मुँहासे, दाग धब्बे ,चेहरे की सिअहियाँ और कई कॉस्मेटिक समस्याओं से छुटकारा पा सकते है। साथ ही, यह प्रभावी ढंग से त्वचा की मृत कोशिकाओं, अतिरिक्त sebum और मलबे को हटाने अद्भुत काम करता है। इसके इलावा ये त्वचा के छिद्रों की सफाई , मुहासों से छुटकारा और blackheads को रोकने में बहुत ही कारगर है | इस औषधि का इतना प्रभावशाली होने की वजह इस में शामिल समग्रिओं का मिश्रण हैं बेकिंग सोडा त्वचा के ph लेवल को संतुलित करता है जिस से मुहासों को रोकने में मदद मिलती है दूसरी ओर, नारियल तेल अद्भुत जीवाणुरोधी, चिकित्सा और मॉइस्चराइजिंग गुणों से भरपूर है । यह त्वचा के स्वास्थ्य में सुधार के लिए बेहद फायदेमंद है।

सामग्री : 2 चमच शुद्ध नारियल तेल 1 चमच बेकिंग सोडा
दिशा-निर्देश : 1. एक छोटी कटोरी में सामग्री ब्लेंड कर के एक पेस्ट की तरह मिश्रण बना लें ।
2. अपने चेहरे पर इस पेस्ट को धीरे धीरे हलके हाथों से रगड़ें |
3. लगभग 5 मिनट के लिए ऐसा करें |
4. इसके बाद गुनगुने पानी से इसे साफ़ कर दें
5. नारियल तेल आपकी त्वचा को हाइड्रेट कर देगा इस लिए बाद में moisturizer का उपयोग करने की जरूरत नहीं है।

18.11.16

बालों को घने काले और लम्बे बनाने के चमत्कारी उपाय




कुछ सालों पहले तक लोगों के सिर पर काफी बाल होते थे। यह वह समय था जब सौन्दर्य उत्पादों और रसायनों का प्रयोग ना के बराबर किया जाता था। तब रास्ते में प्रदूषण भी काफी कम होता था। पर आजकल चीज़ें काफी बदल गयी हैं। लोग अब निरंतर बालों के झड़ने और पतले होने की शिकायतें करते पाए जाते हैं। इसके पीछे उन रसायनों का हाथ है जो बालों की मज़बूती और घनत्व को काफी नुकसान पहुँचता है। बालों के स्टाइलिंग (styling) के उत्पादों का ज़्यादा इस्तेमाल करने पर भी कंघी करते वक़्त बाल बाहर निकल सकते हैं। पर कुछ घरेलू नुस्खों की मदद से आप आसानी से बालों का घनत्व बढ़ा सकते हैं।
स्त्री और पुरुष के लिए बाल सुंदरता का प्रतीक होता है। सुंदर घने बाल अपने आप मे विश्वास जगाता है। कम बालो के कारण शर्म महसूस होती है और आत्मविश्वास की कमी भी होती है जो की मानसिक तनाव का कारण बनती है। बाजार मे बहुत सारे उत्पाद उपलब्ध है जो की बालो को घना बनाने मे आपकी मदद करता है। बालो की चमक बनाए रखने के लिए आपको ज़रूरत होती है सही उत्पाद के चुनाव और उपयोग करने के तरीके की। प्राकृतिक रूप से बालो को घना बनाने के लिए कुछ नुस्खे नीचे बताए गए है।
जब बात खासकर महिलाओं की हो रही हो तो घने बाल काफी खूबसूरत माने जाते हैं। पुराने ज़माने में शादियों के समय लड़के वाले लड़की के बाल की जाँच करते थे कि वे घने, काले तथा सुन्दर हैं या नहीं। अगर बाल सुन्दर हों तो लड़के के घरवाले भी लड़की का खुले दिल से स्वागत करते थे। पर कुछ सालों के बाद लम्बे बालों का चलन कम हो गया और मध्यम आकार के बालों का चलन शुरू हो गया। अब बालों का घना होना और भी ज़्यादा आवश्यक हो गया है। कुछ आसान नुस्खों से आप बालों का घनत्व बढ़ा सकते हैं।
आलू का रस
आलू का रस बालों के झड़ने से लड़ने और घना, लम्बा करने में मदद करता है। आप कुछ आलू का रस का उपयोग करें।
कैसे करें: अपने सिर पर आलू का रस का प्रयोग करें और आप सिर को धोने से पहले 15 मिनट के लिए छोड़ दें। आलू में मौजूद विटामिन बी आपके बालों को और मजबूत बनाता है।
बालों की जड़ो मे रोज तेल से मालिश करना चाहिए जो की रक्त संचार को बढ़ाता है और आपके बालो की जड़ो को मजबूत भी करता है। बालो की जड़ो मे गर्म तेल से और गोलाई मे मालिश करे। जोजोबा का तेल और नारियल का तेल बालो के लिए सबसे अच्छा तेल होता है। रूसी दूर करने के लिए मेहंदी का तेल लगाए | तेल लगाने के बाद और बालो को धोने से पहले बालों को गर्म पानी के तोलिये से 15 मिनिट तक ढक कर रखे, फिर बालो को धोए। ये आपके बालो को चमक देगा | रूसी से बचने के लिए हफ्ते मे 4 बार बालो को धोए और सिर मे सफाई बनाए रखे।
अमला
अमला विटामिन सी का एक भंडार है। यह बालों के विकास को बढ़ावा देता है।
कैसे करें: आंवला पाउडर और नीबू के रस को बराबर भागों मिलाएं। बालों पे इस मिश्रण को लगाना शुरू करें। इसके बाद इसे गुनगुने पानी के साथ धो ले और सूखने दें

बालों के झड़ने से रोकने और घने बाल पाने का सबसे आच्छा तरीका है संतुलित आहार लेना। ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जिसमे की विटामिन और पौष्टिक तत्व जैसे विटामिन ए, सी, तांबा(कॉपर), लोहा(आयरन), ज़िंक मौजूद हो।हमेशा हाइड्रेटेड रहना चाहिये जो की बालो को घना बनाए रखता है इसलिए शरीर मे पानी कमी नही होने देना चाहिये और भरपूर मात्रा मे पानी का सेवन करना चाहिये।
नींबू का रस
नींबू का रस भी आपके बालों को लंबा घना तथा स्वस्थ रखने में सहायक होता है ।
कैसे करें:
दो चम्मच नींबू का रस को थोड़े पानी के साथ मिलाकर लगा ले । 30 मिनट तक इसे करते रहें। इसके बाद गुनगुने पानी और शैम्पू के साथ अपने बालों को धो लें। आप इसे एक सप्ताह में दो बार इसका उपयोग कर सकते हैं।
इस प्रकार बालों की देखभाल करें।
प्याज

प्याज रक्त के परिसंचरण को बढ़ावा और सिर को साफ रखने में मदद करता हैं।
कैसे करें: छोटे टुकड़ों में प्याज काटें और रस निचोड़ ले। अपने सिर पर इस रस को लगा ले। 30 मिनट तक इसे करते रहें। इसके बाद गुनगुने पानी और शैम्पू के साथ अपने बालों को धो लें। आप इसे एक सप्ताह में दो बार इसका उपयोग कर सकते हैं।
कॅनडीशनर आपके बालों को कोमल और चमकीला बनता है बालो को धोने के बाद कॅनडीशनर लगाए और ध्यान रहे कॅनडीशनर बालो की जड़ो से 1-2 इंच की दूरी से लगाए। कॅनडीशनर को बालो की जड़ो मे नही लगाना चाहिये।
अंडे :
नियमित रूप से प्रोटीन बालों को मजबूत और घना बनाने के लिए आवश्यक है।
एक या दो अंडे ले लो और इसे ठीक से मिला लो। गीले बालों पर अंडा लगाना आरम्भ करे और 30 मिनट तक इसे करते रहें। इसके बाद गुनगुने पानी और शैम्पू के साथ अपने बालों को धो लें। आप इसे एक सप्ताह में दो बार इसका उपयोग कर सकते हैं। इस प्रकार बालों की देखभाल करें।
अंडा बालो की जड़ो को मजबूती प्रदान करता है और बालो घना और लंबा भी। एक अंडे को फोड़कर इसका पीला और सफेद भाग अलग कर ले और गीले बालो पर मास्क की तरह 1 घंटे तक लगाकर रखे फिर गर्म पानी या शैम्पू से धो दे। अब आपके बाल घने और चमकदार हो जाएगे। हफ्ते मे 2 बार इस नुस्खे का पालन करे।
जैतून का तेल
गर्म तेल के साथ अपने बालों और सिर की मालिश 45 मिनट करें। इसके बाद शैम्पू का उपयोग कर अपने बाल धो लें। इससे आपके बाल स्वस्थ होंगे और इसमें एक अद्भुत चमक नजर आएगी ।


नारियल का तेल
नारियल का तेल बालों के लिए अच्छा है और इससे आपको घना, मोटा और लम्बा बाल पाने के लिए मदद मिलती है। नारियल के तेल में प्रोटीन मौजूद होते हैं।घना, मोटा और लम्बा बाल प्राप्त करने के लिए नारियल तेल का उपयोग करे, खोपड़ी और बालों में गरम नारियल तेल का मालिश एक गर्म तौलिया के साथ करें। पचास मिनट के लिए इसे ऐसे ही छोड़ दे और फिर एक हल्के शैम्पू से धो लें।
*मेथी के दाने हमेशा रसोई घर मे मिल ही जाते है क्यो ना आप इनका इस्तेमाल करे। रातभर मेथी के दानो को पानी मे भिगोकर रखे फिर सुबह इसे पीस ले। बालो मे 1 घंटे तक लगाकर रखे फिर पानी से धो ले। हफ्ते मे 2 बार लगाए जिससे आप पाएगे काले और लम्बे घने बाल।
संतरे का रस
संतरे का रस भी मोटा बालों को घना करने के लिए एक बहुत अच्छा तरीका ह। यह बालों के विकास को बढ़ावा देता है।
संतरे का रस और सेब का एक मिश्रण स्वाभाविक रूप से घना बाल पाने के लिए एक अच्छा तरीका है। एक सप्ताह में दो बार, तीस मिनट के लिए अपने बाल में लगाए। यह अच्छी तरह से मिश्रित होना चाहिए।
गुडहल का फूल बालों के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। नारियल और शीशम के तेल मे गुडहल के फूल का घोल मिलाए और बालो की ग्रोथ के लिए बालो मे 15 मिनिट तक लगाकर रखे फिर बालो को धो ले।
घने बालो के लिए उपाय – अरंडी का तेल (Castor oil)
यह एक चिपचिपा तेल है जिसकी गंध शायद आपको पसंद ना आए। पर ज़्यादातर लोगों का यह मानना है कि बालों को घना करने के लिए यह सबसे बेहतरीन तेल है। दूसरे तेलों के मुकाबले यह तेल चिपचिपा होता है जिससे कि बालों में अच्छे से लग जाता है और बालों का टूटना रोक देता है। इस तेल में फैटी एसिड एवं विटामिन इ के गुण होते हैं जो बालों को बढ़ाने में सहायता करते हैं। अगर आपको लगता है कि यह तेल ज़्यादा गाढ़ा और चिपचिपा है तो इसमें नारियल का तेल मिलाकर इसे गर्म करें। अब इसे बालों की जड़ों तक लगाएं। घने बाल पाने के लिए बालों पर गोलाकार मुद्रा में मालिश करें।
तनाव के कारण भी बाल कम और सफेद होते है इसलिए इन सब से बचने के लिए कोशिश करे की तनाव रहित रहे। तनाव से दूर रहने के लिए योगा , कसरत, ध्यान आदि कर सकते है। बालो को लंबा, काला और मजबूत बनाने के लिए उपर दी गई विधियो का पालन करे। जिसे आप ज़रूर ही अपने बालो मे एक बहतर फ़र्क महसूस करेगे।
अमला
अमला विटामिन सी का एक भंडार है। यह बालों के विकास को बढ़ावा देता है।
कैसे करें: आंवला पाउडर और नीबू के रस को बराबर भागों मिलाएं। बालों पे इस मिश्रण को लगाना शुरू करें। इसके बाद इसे गुनगुने पानी के साथ धो ले और सूखने दें।

15.11.16

7 बीमारियों की एक दवा= नमक+नींबू+काली मिर्च




नमक, काली मिर्च और नींबू के इस प्रयोग से इन 7 बिमारियों को किसी भी दवा से बेहतर ठीक कर सकते हैं..!!
मौसम के बदलने पर लोग अक्सर बीमार पड़ जाते है. बुखार व खांसी हो जाती है,जिसकी वजह से बार-बार हॉस्पिटल के चक्कर लगाने पड़ते है. मानसून आने वाला है ऐसे में कई लोग वेदर चेंज को आसानी से सह नहीं पाते और उनके लिए छोटी से बीमारी बड़ी बिमारी का रूप ले लेती है. इन छोटी-छोटी बीमारी की वजह से आपको हॉस्पिटल के चक्कर न काटना पड़े इसके लिए आप घर में ही घरेलु उपचार कर सकते है. तो बताते  है नमक,नींबू और काली मिर्च के मिश्रण के कुछ चमत्कारी  फायदे –
Salt, Pepper and Lemon / नमक, काली मिर्च और नींबू
नमक (1 छोटा चम्‍मच), काली मिर्च (½ छोटा चम्‍मच) और नींबू (कुछ बूंद) के रस से 7 तरह की बीमारियों को ठीक कर सकते हैं । जी हां, आपकी जानकारी के लिये हम नीचे बताएंगे कि यह कौन कौन सी बीमारियों को ठीक कर सकता है।
*वजन घटाए
एक चौथाई छोटा चमच पीसी हुए काली मिर्च , 2 बड़े चमच ताज़ा निम्बू का रस , 1 बड़ा चमच शहद लेकर एक ग्लास पानी में मिला लें |
रोज सुबह खाली पेट इस मिश्रण को लेने से शरीर का मैटाबॉलिज्‍म तेज होता है और वजन घटाने में मदद मिलती है।
*दांत दर्द में राहत
1/2 छोटा चमच पीसी हुई काली मिर्च, 1/2 छोटा चमच लौंग का तेल ले कर मिला लें | इस मिश्रण को गरम पानी में मिला कर कुल्‍ला कीजिये, आपका दांत दर्द खतम हो जाएगा।
*.फ्लू भगाए
अगर इस मिश्रण को शहद के साथ खाएं तो फ्लू पैदा करने वाले वायरस और रोगाणुओं की छुट्टी हो जाती है।
*.मतली कम कर देता है

एक बड़ा चमच नीम्बू का रस , एक छोटा चमच काली मिर्च ले कर एक गिलास गरम पानी में मिला घूंट घूंट कर के पिए |ये मिश्रण आपके पेट में बढ़े हुए एसिड को कम कर देता हैं, इसलिये आपको जब भी मतली या एसिडिटी का एहसास हो तो, इसे लेना ना भूलें।
*.बंद नाक को खोले
इन तीनों का मिश्रण अगर गरम पानी के साथ लिया जाए तो यह शरीर में गर्मी का उत्पादन कर के नाक की नली में हुई सूजन को कम करेगा और बंद नाक को खोलेगा।
*.गले के दर्द में राहत दिलाए
इस मिश्रण में एंटीबैक्‍टीरियल गुण होते हैं जो गले में पनप रहे बैक्‍टीरिया का नाश कर के गले के दर्द से राहत दिलाता है। एक बड़ा चमच ताज़ा निम्बू का रस, 1/2 छोटा चमच पिसी हुए काली मिर्च और एक छोटा चमच उच्च गुणवत्ता वाला नमक लेकर एक गिलास गरम पानी में मिला लें इस मिश्रण से दिन में कई बार कुल्ला करें इस से आपको गले के दर्द और खांसी से राहत मिलेगी|
*.गॉलस्‍टोन ठीक करे
यदी इन तीनों मिश्रण के साथ जैतून का तेल भी मिला लिया जाए और फिर इसका सेवन किया जाए तो यह मिश्रण बड़ा ही शक्तिशाली बन जाता है। तब यह मिश्रण गॉल ब्‍लैडर में इकत्रित स्‍टोन्‍स को घुलने में मदद करता है। लेकिन इसको नियमित लेना होगा।

12.11.16

सिर्फ 3 दिन में पाएं शरीर और जोड़ो के दर्द से छुटकारा,





अक्सर बढती उम्र अपने साथ कुछ बीमारियों को ले आती है जिन में जोड़ो का दर्द आम है | जोड़ो का दर्द कई तरह से अनुभव किया जाता है जैसे के सीढियां चढ़ते समय या कोई भारी काम करते समय| पहले तो जोड़ो के दर्द से बूढ़े लोग परेशान थे लेकिन अब तो यह जवान महिलाओं और पुरषों को भी होने लग गया है|
जोड़ो का दर्द शरीर का एक ऐसा दर्द होता है जिस का वर्णन करना मुश्किल होता है क्यूंकि जिस को यह दर्द होता है उसी को पता होता है |यह बेहद भयंकर दर्द होता है जिससे इंसान के स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाता है
जोड़ो का दर्द किसी भी कारण हो सकता है जैसे के बढती उम्र, जोड़ो में तरल की कमी तथा किसी प्रकार की चोट |आज हम आपके लिए एक ऐसा नुख्सा लेकर आये है जिस के इस्तेमाल से आपके जोड़ो का दर्द मानो छूमंतर हो जायेगा




आवश्यक सामग्री
5-6 गाजर
½ चमच काली मिर्च
2 cm ताजा अदरक का टुकड़ा
½ चम्च हल्दी
बनाने की विधि
गाजर को अच्छी तरह से साफ़ कर लेना है और काट लेना है | उसके बाद अदरक हल्दी और काली मिर्च का पाउडर बना लेना है और इन सब को इक साथ ब्लेंडर में डाल कर ब्लेंड कर लेना है जब तक के यह अच्छी तरह से मिक्स न हो जाये सम्पूर्ण मिश्रण बन जाने के बाद रोजाना तीन बार 50 से 60 ml सेवन करना है लेकिन ध्यान रखे के इस मिश्रण का सेवन खाना खाने के आधा घंटा पहले करे | अगर यह मिश्रण ज्यादा गाढ़ा हो जाये तो आप इसमें जरूरत अनुसार पानी मिला सकते हो |आप को जल्द ही फर्क महसूस होगा |

विशिष्ट परामर्श-

गठिया , संधिवात , कटिवात,साईटिका ,घुटनो की पीड़ा जैसे वात रोगों मे वैध्य श्री दामोदर 98267-95656 की जड़ी- बूटी निर्मित औषधि सर्वाधिक असरदार साबित होती है| बिस्तर पकड़े रोगी भी इस औषधि  से दर्द मुक्त होकर  चलने फिरने योग्य हो जाते हैं| 


लहसुन से मचाये रात भर बिस्तर पर धमा चौकड़ी




आपने सेक्स पावर बढाने के लिए लोगों को विभिन्न प्रकार दवाई, टेबलेट और इजेक्शन लेते देखा होगा लेकिन क्या आपको पता है कि कुछ प्रकृति चीजें है ज्यादा इन दवाईयों से ज्यादा गुणकारी है। प्रकृति की कई ऎसी चीजें है जो दवाईयों के मुकाबले कहीं अधिक सेक्स पावर बढाती हैं हम आपको उनके बारे में रूबरू कराते है। ये प्रकृति चीजें जो आसानी से उपलब्ध होती और आपकी सेक्स पॉवर को बढाती है। इनकी उपयोगिता को यदि गंभीरता से सीखा और जाना जाए तो ये बेहद कारगर साबित हो सकती हैं। दुनियाभर में इन वस्तुओं पर इतने प्रयोग हो चुके हैं कि ये भी सामने आया है कि यह आपकी सेक्स क्षमता को भी कई गुना बढा सकती हैं।
मर्दाना ताक़त, जोड़ो का दर्द , (सन्धिवात ), सायटिका, हिचकी, श्वास, सिर दर्द, अपस्मार, गुल्म, उदर रोग, प्लीहा, कृमि, शौथ, अग्निमान्ध, पक्षाघात, खांसी, शूल आदि के लिए उत्तम औषिधि – लहसुन पाक।
लहसुन पाक पोष्टिक आहार के रूप में वाजीकारक योग हैं। विवाहित पुरुषों के लिए यौन शक्तिदायक वृद्धक तो होता ही है साथ ही शरीर की सप्त धातुओं को पुष्ट और सबल करके शरीर को सुडौल और बलवान बनाने वाला भी है। 



लहसुन पाक बनाने की विधि-

लहसुन की 100 ग्राम कलियोँ को , इनका छिलका अलग करके , काट कर छोटे-छोटे टुकड़े कर लें। एक लीटर दूध में एक गिलास पानी डाल कर, ये सभी टुकड़े डाल दें और गरम होने के लिए रख दें। उबल जाने पर जब दूध गाढ़ा हो जाये और मावा जैसा बन जाये तब उतार कर ठंडा कर लें और मिक्सी में पीसकर लुगदी बना लें।
एक कढाई में थोडा सा शुद्ध देशी घी गरम करके इस लुगदी को डाल दें और धीमी ( मंदी ) आंच पर पकाएं। जब लाल हो जाये तब इसे उतार लें यदि घी बच जाए तो अलग कर लें। अब इसमें आवश्यक मात्रा में शक्कर की चाशनी तैयार करें।
भुनी हुई लुगदी और केशर 1 ग्राम, लौंग 2 ग्राम, जायफल 2 ग्राम, दालचीनी 2 ग्राम, और सौंठ 5 ग्राम — इन सबको बारीक़ पीसकर चाशनी में डाल दें और भली-भांति मिला लें और थाली में फैला कर जमा लें यही लहसुन पाक है।
यह पाक सुबह शाम ( रात को सोने से पहले ) एक-एक चम्मच की मात्रा में, मिश्री मिले हुए हलके गरम दूध के साथ कम से कम 60 दिन तक सेवन करना चाहिए।
इसके सेवन से जोड़ो का दर्द, (सन्धिवात ), सायटिका, हिचकी, श्वास, सिर दर्द, अपस्मार, गुल्म, उदर रोग, प्लीहा, कृमि ,शौथ, अग्निमान्ध, पक्षाघात, खांसी, शूल, आदि अनेक रोगों को निरोगी बनाने में सहायक होता है तथा स्नायविक संस्थान की कमजोरी, व यौन शिथिलता दूर करके बल प्रदान करता है।
एसे रोगों से ग्रस्त रोगी के अलावा यह पाक प्रौढ़ एवम वृद्ध स्त्री पुरुषों के लिए शीतकाल में सेवन योग्य उत्तम योग है।

6.11.16

अनचाहा गर्भ गिराने के सही तरीके और उपाय


पहले तिमाही में गर्भपात
निर्वात पंप से गर्भपात करना
यह गर्भ के पहले तिमाही यानी १२ सप्ताह तक प्रयोग किया जा सकता है| यह एक सुरक्षित और अच्छा तरीका है| इसके अधिकांश स्थितियों में बच्चेदानी के मुँह को फैलाना नहीं पडता है| बच्चादानी या उसके मुँह में चोट लगने की संभावना कम रहती है| संक्रमण कम होता है और रक्तस्त्राव भी कम होता है| डी.एण्ड सी (क्युरेटिंग) तरीके में विपरीत घटनाओं का संभावना अधिक रहती है|
गर्भपात कराने में कोई भी सक्षम डॉक्टर जो प्रशिक्षित हो, इसे कर सकता है|
इसका उपयोग १२ सप्ताह तक के गर्भ की गर्भपात , १२ सप्ताह तक का अपूर्ण गर्भपात और अलक्षित गर्भपात में किया जा सकता है|
इन महिलाओं में इसका इस्तेमाल न करे जिन्हे योनी या योनी संक्रमण के लक्षण हो, जिसमें पहले किए गए इलाज के कारण बच्चेदानी में छेद होने का संदेह है| जहॉं अस्थान गर्भ होने का संदेह है|
इन महिलाओं में इसका इस्तेमाल करते हुए विशेष ध्यान दे - २० वर्ष से कम उम्र वाली औरते, अगर बच्चादानी में गोला है (फाईब्राइड) अगर बच्चादानी का मुँह सिकुडा हुआ है, अगर उसे पहले बच्चादानी का ऑपरेशन हुआ हो, और अगर अन्य बिमारियॉं हो जैसे बहुत ज्यादा खून की कमी, रक्तचाप बढा हुआ हो, शक्कर की बिमारी, दिल की बिमारी, गुर्दे की बिमारी हो, या खून जमने में गडबडी हो, हो,इसके इस्तेमाल में महिला को बेहोश नहीं करना पडता है, दर्द के लिए गोलियॉं और स्थानीय इंजेक्शन (सुन्नपन के लिए) पर्याप्त है|
महिला को खतरे के संकेत के बारे में बताएँ| अगर अधिक रक्त स्त्राव या पेट में दर्द हो तो तुरंत अस्पताल वापस जाएँ|
गर्भ निरोधक विधि अपनाना चाहे तो उपलब्ध कराएँ|
गोलियॉं द्वारा गर्भपात कराना-
इसमें दो दवाओं का इस्तेमाल होता है - मेफिप्रेस्टोन और मीसोप्रोस्टॉल| यह विधी गर्भ के पहले सात सप्ताह (४९ दिन तक) सबसे प्रभावशाली होता है, मगर उसके बाद भी ९ सप्ताह (६३ दिन) तक उपयोग किया जा 


सकता है।
५% तक महिलाओं में इसके बाद अपूर्ण गर्भपात होने के कारण डी एण्ड सी करवाना पडता है, मगर बाकी में अपने आप गर्भपात पूर्ण हो जाता है|
जिन महिलाओं को गंभीर अनिमिया है (८ ग्राम से कम) उच्च रक्तचाप है योनी प्रदाहक रोग है, मिर्गी की बिमारी है इनमें गोलियॉं न दे|
पहले दिन मेफिप्रेस्टोन की एक गोली (२०० मि.ग्रा.) खाने को दे| तीसरा दिन मीसोप्रोस्टॉल की ४०० मैक्रोग्राम (२०० मै.ग्रा. के दो गोली) मुँह से ले या योनी में लगाएँ|
रक्तस्त्राव ८-१३ दिन तक हो सकता है और भारी माहवारी जैसे होता है| अगली माहवारी १-२ सप्ताह देर से हो सकती है|
महिला को काफी पेट दर्द और मितली हो सकती है| इसे कम करने की दवाइयॉं दे|
अगर मीसोप्रोस्टॉल की गोलियॉं खाने बाद महिला तुरन्त उल्टी कर डालती है या गोली खाने से २४ घंटे बाद भी रक्तस्त्राव शुरु नही होती तो मीसोप्रोस्टॉल की ४०० मैक्रोग्राम की एक और खुराक दे|
विशेष सूचना
गर्भपात गर्भ निरोधन पद्धती नही है। अन्य विकल्प ना होनेपर ही गर्भपात करवाएँ। उचित समय पर गर्भ निरोधक साधनोंका प्रयोग करे और गर्भपात टालना उत्तम नीति है।
गर्भपात में किसी ना किसी तकलीफ या खतरे की संभावना रहती है।
गर्भपात के बाद कभी-कभी बांझपन भी आ सकता है।
गर्भपात हेतू कभी भी झोला छाप डॉक्टर या बाबा के पास ना जाएँ। उससे खर्च, समय और जानलेवा खतरा कईं गुना बढ जाता है। गर्भपात केंद्र भी अधिकृत होने का भरोसा कर ले।
१२-२० हफ्तोंका गर्भपात सुव्यवस्थित अस्पताल में ही करवाएँ।
गर्भपात हेतू डॉक्टर भी मान्यता प्राप्त होना चाहिये। गर्भपात केंद्र में इसका दाखिला होता है।
गर्भपात करवाना गुनाह नहीं है। खुदको इसके लिये अपराधी न समझे। सही कारण हेतु गर्भपात करवाना आपका हक है।
हर गर्भपात का ठीक पंजीयन अस्पतालमें किया जाता है।
इस गर्भपात के बाद बच्चे की चाहत ना होने पर नसबंदी करवाना उत्तम है।
गर्भधारण के २० हफ्तों बाद गर्भपात करवाना गैरकानूनी है और यह स्वास्थ्य के हिसाब से खतरनाक भी है। १२ हफ्तों से पहले गर्भपात करने का तरीका १२ से २० हफ्तों के बीच गर्भपात करने के तरीके से अलग होता है।
 


गर्भपात कौन कर सकता है?
सिर्फ प्रशिक्षित चिकित्सीय विशेषज्ञ ही गर्भपात कर सकते हैं। डॉक्टर जो विशेषज्ञ है वही गर्भपात कर सकते हैं। अन्य एम.बी.बी.एस. डॉक्टर या विशेषज्ञ भी किसी मान्यता प्राप्त सरकारी केन्द्र में गर्भपात का प्रशिक्षण हासिल कर सकते हैं। इसके बाद ही वो गर्भपात करवा सकते हैं।
म.टी.पी. करने वाले केन्द्र में सभी सुविधाएँ उपलब्ध होनी चाहिए। और उसे मान्यता के लिए सर्टिफिकेट मिला हुआ होना चाहिए। स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा मान्यता मिले बगैर किसी भी अस्पताल या क्लीनिक में गर्भपात नहीं किया जा सकता। अगर उस केन्द्र में पेट के ऑपरेशन, खून चढ़ाने और ऐनेस्थीशिया की सुविधा हो तो २० हफ्तों के भीतर होने वाले गर्भपात की इजाज़त मिल सकता है। छोटे केन्द्रों में गर्भधारण के १२ हफ्तों के भीतर के गर्भपात हो सकते हैं। १२ हफ्तों के बाद के गर्भपात के लिए दो डॉक्टरों का सहयोग और गर्भपात का निर्णय लेना ज़रूरी है। १२ हफ्तों से कम वाले गर्भपात में एक डॉक्टर की राय भी काफी होती है

28.10.16

ब्लड शुगर (Diabetes) और मोटापे का काल है आक का पत्ता


इसके पत्ते के इस्तेमाल से आप सिर्फ 7 दिन से 3 महीने के भीतर शुगर से मुक्त हो सकते हैं यह बिलकुल सच है कि आक का पत्ता मोटापे और डायबिटीज का काल बन सकता है बहुत सारे लोग इस उपाय से फायदा उठा चुके है तो देर किस बात की है आप भी इस आक के पत्ते या आकडे के पत्ते का प्रयोग करके इससे फायदा उठा सकते है आप इस आक के पत्ते का प्रयोग करके 5 दिन से लेकर 2 महीने के अंदर ब्लड शुगर को कण्ट्रोल कर सकते है यह प्रयोग न केवल शुगर बल्कि मोटापे को कम करने को लेकर भी काफी असरदार है कुछ लोगो ने तो इस प्रयोग से कुछ ही दिनों में फायदा पाया हैप्रयोग की विधि :-
आपको करना बस इतना है की इस आकडे के पत्ते को लेकर उल्टा करके यानि की खुरदरा भाग पैर के तलवे पर लपेटकर ऊपर से मोजा पहन ले आप पूरा दिन इसको ऐसे ही लगा रहने दे और रात को सोते समय इसको निकाल दे थोड़ी देर अपने पैर को हवा लगाकर फिर दोबारा दूसरा पत्ता लेकर बांध ले कुछ ही दिनों में आपका शुगर लेवल कम हो जायेगा यह पोधा आपको हर जगह आसानी से मिल जायेगा इस पोधे के प्रयोग करने से आपका मोटाप भी कम होगा
सावधानी :-
इस प्रयोग को करने में एक सावधानी बरतनी है जब भी आप आकडे के पत्ते को तोड़े तो इससे दूध निकलता है आप उसको हाथ न लगाये क्योकि वो दूध अगर आँख में चला जाता है तो नुकसान करता है तो आप यह प्रयोग करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखे|
तो मित्रों , आप भी इस प्रयोग को आज से ही शुरू करे और इससे फायदा उठाये लेकिन  आप इसके साथ साथ अपने खानपान और दिनचर्या का विशेष ध्यान रखे क्योकि किसी भी रोग को दूर करने में इनका अहम रोल होता है आपको स्वस्थ रखने में |

20.10.16

मूत्र रोगों की रामबाण होम्योपैथिक चिकित्सा



इस लेख मे मूत्र रोग और इसके होमियोपैथिक चिकित्सा निदान पर चर्चा करेंगे।
मूत्र का रोग भी हो सकता है, ऐसा कोई निरोग व्यक्ति नही सोच सकता है, लेकिन जिसे यह रोग हो जाता है वहीं काफी परेशान हो जाता है। मूत्र विकार के अंतर्गत कई रोग आते हैं जिनमें मूत्र की जलन, मूत्र रुक जाना, मूत्र रुक-रुककर आना, मूत्रकृच्छ और बहुमूत्र प्रमुख हैं| यह सभी रोग बड़े कष्टदायी होते हैं। यदि इनका यथाशीघ्र उपचार न किया जाए तो घातक परिणाम भुगतने पड़ते हैं। भागदौड की जिन्दगी जीनेवाले लोगों में मूत्र रोग की समस्या होती है। जीवन शैली से यह बीमारी जुड़ गयी है। इसके कारण न सिर्फ मूत्र रोग बल्कि नपुंसकता की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि यौन मार्ग की सफाई पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। सफाई के अभाव में संक्रमण होने की संभावना रहती है। ऐसे रोगी जिनके मूत्र मार्ग में 5 मि.मी.से कम आकार की पथरी कोई परेशानी नहीं कर रही है तो चिंता करने की बात नहीं है। ऐसे लोगों को 24 घंटे में इतना पानी पीना चाहिए जिससे कि दो-तीन लीटर पेशाब हो सके।
कारण:
यदि मूत्राशय में पेशाब इकट्ठा होने के बाद किसी रुकावट की वजह से बाहर न निकले तो उसे मूत्रावरोध कहते हैं| स्त्रियों में किसी बाहरी चीज के कारण तथा पुरुषों में सूजाक, गरमी आदि से मूत्राशय एवं मूत्र मार्ग पर दबाव पड़ता है जिससे पेशाब रुक जाता है| वृद्ध पुरुषों की पौरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट ग्लैंड) बढ़ जाती है जिसके कारण उनका मूत्र रुक जाता है|
मूत्रकृच्छ में पेशाब करते समय दर्द होता है| जब मूत्राशय में दर्द उत्पन्न होता है तो पेशाब रुक जाता है| इसी प्रकार हिस्टीरिया (स्त्री रोग), चिन्ता, सिर में चोट लग जाना, आमाशय का विकार, खराब पीना, आतशक, कब्ज, पौष्टिक भोजन की कमी आदि के कारण भी बार-बार पेशाब आता है|मूत्र पथ का संक्रमण समुदाय-प्राप्त हो सकता है या अस्पताल में मूत्र पथ में उपयोग किये जानेवाले उपकरण (मूत्राशय कैथीटेराइजेशन) के जरिये भी प्राप्त हो सकता है। समुदाय-प्राप्त संक्रमण बैक्टीरिया के द्वारा होते है। इनमें सबसे सामान्य जन्तु ‘ई. कोलई’ कहा जाता है। प्रतिरोधी बैक्टीरिया और फंगस (कवक) से अस्पताल-प्राप्त संक्रमण हो सकते हैं।


पहचान:
मूत्र की कमी या न निकलने से मूत्राशय फूल जाता है| रोगी को बड़ी बेचैनी होती है| मूत्र बड़े कष्ट के साथ बूंद-बूंद करके निकलता है| कब्ज, मन्दाग्नि, अधिक प्यास, पेशाब अधिक आने, मूत्र पीला होने आदि के कारण रोगी को नींद नहीं आती| वह दिन-प्रतिदिन कमजोर होता जाता है| कमर, जांघों तथा पिंडलियों में दर्द होता है|
निदान:
इस संक्रमण का पता करने के लिए कई प्रकार के परीक्षण हैं, इनमें सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण है मूत्र का विश्लेषण करना। जाँच के लिए मूत्र का नमूना भेजा जाता है। उसमें अगर बैक्टीरिया और श्वेत रक्त कोशिकाओं की मौजूदगी से मरीज़ के संक्रमण से ग्रसित होने का पता लगता है। इसके अलावा भी कई जाँचें कराई जा सकती हैं जैसे टोटल ब्लड काउंट, इंट्रावीनस पायलोग्राम (आईवीपी), सीटी स्कैन और ब्लड कल्चर।
लक्षण अनुसार होमियोपैथिक चिकित्सा:
१. डायबिटीज-इसीपीड्स(इसमें चीनी विल्कुल नही रहती) अधिक मात्र में और जल्दी जल्दी पेशाब होने के साथ पेशाब में यूरिया निकलना, उसके साथ प्यास, शीर्णता और बेचैनी रहना। इस तरह के मूत्र सबंधी बीमारी में हेलोनियस ३०,२०० काफी लाभप्रद है।
२. रात के समय पेशाब का बढ़ना,अधिक मात्रा में पेशाब का होना, दिन में भी बार बार पेशाब का होना साथ ही अधिक प्यास का लगाना आदि लक्षणों में प्लैण्टेगो Q,2X, 3Xशक्ति की दवा काफी लाभप्रद है।
३. पेशाब होने के पहले और बाद में मूत्र नली में जलन होने पर रोग कोई भी होवल्गेरिस Q पाँच बून्द दो ५० मिली पानी में मिला कर तीन समय लें, शर्तिया लाभप्रद है।
४. पेशाब रुक रुक कर होना, मानो मूत्र यंत्र में पक्षाघात हो गया हो। प्रोस्टेट ग्रंथि की वृद्धि हो गयी हो तो इसके लिए कोनायम ३० का सेवन दिन में तीन बार करने से बीमारी में राहत मिल जाती है। इस तरह की बीमारी में सेबलसेरु ३० भी काफी लाभप्रद है।
५. पेशाब करते वक्त नही बल्कि अन्य समय में मूत्राशय में जलन होने परस्टेफिसेग्रिया ३० रामबाण अौषधी का काम करता है।
६. काइल्यूरिया की बीमारी में पेशाब या तो पानी की तरह बिलकुल साफ रहता है या फिर मैदे की बुकनी की तरह खूब गाढ़ा, दूध या चाय की तरह के रंग वाला होता है। इस तरह की बीमारी में सिट्लिंजिया Q,३,६ शक्ति की दवा काफी लाभप्रद है।
७. पेशाब का वेग बना रहना, रात के समय ही यह वेग ज्यादा रहना। वेग रहने पर भी मूत्राशय की शक्ति घट जाना, जिस कारण बहुत देर बैठने पर भी पेशाब का धीरे धीरे होना,पेशाब होने के बाद भी बूंद बूंद पेशाब टपका करना, आग की तरह पेशाब का गरम होना लक्षणों में केलि कार्ब ३० शक्ति की दवा का तीन बार चार चार गोली का सेवन करना चाहिए।
८. पेशाब करते समय जोर लगाना, मूत्रावरोध, जलन, मूत्राशय ग्रीवा में दर्द,मूत्र पथरी निकलने के समय भयंकर दर्द, इसमें बायोकेमिक दवा मैग्नेशिया फास १२X काफी लाभप्रद है। चार चार गोली ग्राम पानी के साथ लेने से रोग की तीव्रता में लाभदायक सिद्ध होती है।
९. बहुमूत्र रोग की प्रधान परिक्षित दवा नेट्रम फास १२X है। १०. बहुत मात्रा में पीले रंग का पेशाब का होना, छीकते या खांसते समय, या अनजाने में चलते चलते पेशाब का निकलना, पेशाब करते समय किसी के अगल बगल रहने पर पेशाब का न उतरना, ऐसी परिस्थिति में नेट्रम म्यूर ३X से उच्च शक्ति की दवा काफी लाभप्रद है।


११. पेशाब में रक्तस्राव, पेशाब में लाल रंग की तलछट, पेशाब में चीनी का होना, आपेक्षिक गुरुत्व घट जाना, मूत्राशय में प्रदाह और स्फीति, सुई चभने सा दर्द रहने पर केलि फास ३X से उच्च शक्ति की दवा का प्रयोग करना चाहिए।
१२. सर्जिकल आपरेशन होने के बाद पेशाब के बंद होने पर कास्टिकम ३० लाभप्रद है।
१३. मूत्राशय के भीतर एक प्रकार का दर्द होता है,मानो मूत्राशय फूल उठा हो बार बार और जल्दी जल्दी पेशाब का होना, पेशाब में बदबू रहती है, रोगी के शरीर पर सूजन आ जाती है और वह सो नही पाता है, इस तरह की बीमारी में मैजलिस क्यू या ३ शक्ति की दवा का प्रयोग करें चाहिए।
१४. गर्भवती स्त्रियों के पेशाब में या साधारण पेशाब में एल्बुमेन या फास्फेट रहने पर हेलोनियस ३०, २०० की शक्ति फायदा करती है।
१५. रात में बार बार पेशाब बहुत मात्र में होना,एकाएक इतने जोर से पेशाब का लगना मानों कपड़े में हो जायेगा,, बिछोने में ही पेशाब का हो जाना और ऐसा समझना की ठीक पेशाब की जगह पर ही पेशाब कर रहें हैं; किन्तु नींद खुलने पर मालूम होना की था ऐसी स्थिति में क्रियोजोटम ६X शक्ति से १००० शक्ति की दवा का प्रयोग करना चाहिए।
१६. रोगी को तेज प्यास,शरीर का चमड़ा फीका और सुखा, शरीर में भयानक दाह, रह रह कर पसीना होना, साफ पानी की तरह बार बार पेशाब होना और उसके साथ पतले डीएसटी आना, वमन शोथ इत्यादि लक्षण रहने पर एसिड एसेटिक ३० शक्ति की दवा लाभप्रद है।
१७. चीनी मिला बहुमूत्र बार बार होना अधिक भूख-प्यास, रोगी का दिन पर दिन दुबला होते जाना पेट में वायु इकठा होना पाकस्थली में जलन रहने पर यूरेनियम नाइट्रिकम२X,६X, ३० शक्ति की दवा लाभकारी होती है।
१८. सिजिजियम जम्बोलिनम क्यू और २X शक्ति की दवा चीनी मिले बहुमूत्र की प्रधान दवा है। ड़ॉ बोरिक का कथन है- "पेशाब से चीनी का परिणाम घटाने या दूर करनेवाली इसके जोड़ की प्राय कोई दूसरी दवा नही दिखाई देती।"
१९. बहुत चीनी मिला पेशाब, उसके साथ ही अत्यंत पसीना मनो नहा लिया हो इसमें ऐमोन एसेटिक फायदा करती है। २०. पेशाब में घोड़े की पेशाब की तरह गंध हो, अनजाने में पेशाब हो जाता हो, वाट गठिया की बीमारी हो तो एसिड नाइट्रिक विशेष रूप से लाभप्रद है।
२१. खून का पेशाब या खून मिला पेशाब होने पर टेरेबिएन्था लाभप्रद है।

17.10.16

प्याज से रात भर बिस्तर पर मचाएँ धूम!



आहार विशेषज्ञों एवं सेक्सुअल रोगों के विशेषज्ञों क़ी मानें तो प्याज भोजन में रूचि को तो बढाता ही है, साथ ही सेक्सुअल दुर्बलता को दूर करने में भी काफी उपयोगी पाया जाता है I सुखी एवं संतुष्ट वैवाहिक जीवन के लिए सम्भोग शक्ति का प्रबल होना भी एक आवश्यक पहलू है और इनकी प्राप्ति हेतु प्याज एक सरल उपाय हैI अतः यौन शक्ति के संवर्धन एवं संरक्षण के लिए प्याज एक सस्ता एवं सुलभ विकल्प है..!
* सफ़ेद प्याज के रस को अदरख के रस के साथ मिलाकर शुद्ध शहद तथा देशी घी प्रत्येक क़ी पांच-पांच ग्राम क़ी मात्रा लेकर एक साथ मिलाकर सुबह नियम से एक माह तक सेवन करें और लाभ देखें इससे यौन क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जाती है I
*प्याज का रस और शहद बराबर मात्रा में मिलाकर एक शरबत जैसा गाढा द्रव्य प्राप्त करें ..अब इसे दस से पंद्रह ग्राम क़ी मात्रा में नियमित सेवन करें |यह योग आपको निश्चत ही यौन स्फूर्ति प्रदान करेगा !
*कामशक्ति को बढाने हेतु प्याज का एक और प्रयोग निम्नवत है :-




 लाल प्याज पचास ग्राम क़ी मात्रा में लेकर इसे देशी घी पचास ग्राम और ढाई सौ ग्राम दूध मिलाकर गर्म कर नियमित चाटना चाहिए ...शीत ऋतु में इस योग को नियमित रूप से दो से तीन बार लिया जाना चाहिए I गर्मीयों में इस योग सूर्योदय से पूर्व केवल एक बार करें तो बेहतर है I
*जिन्हें शीघ्रपतन (प्री-मेच्युर इजेकुलेशन) क़ी समस्या है ,उन्हें ढाई ग्राम शहद एवं इतना ही प्याज का रस मिलाकर चाटना चाहिए| इस प्रयोग को शीत ऋतु में दो से तीन बार किया जाना चाहिए|.ध्यान रहे क़ि गर्मीयों में इस प्रयोग को सूर्योदय से पूर्व केवल एक बार ही किया जाय तो बेहतर है I
*प्याज को पीसकर गुड मिलाकर खाने से वीर्य (सीमन ) वृद्धि देखी जाती है I
*
शीघ्रपतन रोगियों के लिए एक और प्रयोग काफी लाभकारी होता है :- सौ ग्राम अजवाइन लेकर सफ़ेद प्याज के रस में भिंगोकर सुखा लें,सूख जाने पर पुनः पुनः प्याज के रस में भिंगोकर तीन बार सुखाएं I अब अच्छी तरह सूख जाने पर इसका बारीक पाउडर बना लें,अब इस पाउडर को पांच ग्राम की मात्रा में घी और शक्कर की लगभग पांच ग्राम की मात्रा से सेवन करें I इस योग को इक्कीस दिन तक लेने पर शीघ्रपतन में लाभ मिलता है
*एक किलो प्याज के रस में आधा किलो उड़द की काली दाल मिलाकर पीस कर पीठी बना लें और इसे सुखा लें, सूख जाने पर पीठी को एक किलो प्याज के रस में पुनः दुबारा पीसें और पुनः दुबारा पीस कर लिख लें Iअब इस पीठी को दस ग्राम की मात्रा में लेकर भैंस की दूध में पुनः पकायें और इच्छानुसार शक्कर डाल कर पी जाएँ, इस योग का सेवन लगातार तीस दिन तक सुबह शाम सेवन करने से सेक्स स्तम्भन शक्ति बढ़ जाती है !
*एक किलो प्याज का रस ,एक किलो शहद के साथ लेकर उसमें आधा किलो शक्कर मिलाकर किसी साफ़ सुथरे डिब्बे में पैक कर लें ..अब इसे पंद्रह ग्राम की मात्रा में एक माह तक रोज नियमित सेवन करें I इस योग के प्रयोग से सेक्सुअल डिजायर में वृद्धि देखी जाती है I
*प्याज का रस एक चम्मच,आधा चम्मच शहद मिलाकर पीने से वीर्य की वृद्धि होती है I

*प्याज एक प्राकृतिक यौन शक्ति वर्धक और शीघ्रपतन को दूर कर स्तम्भन बढ़ाने वाला हैं। इसके हमने अनेक यौन शक्ति वर्धक प्रयोग आपको बताये। आज हम आपको बताने जा रहे हैं सफ़ेद प्याज या लाल प्याज का एक ऐसा प्रयोग जो बिलकुल सस्ता सा हैं और जिसको आप हर रोज़ करेंगे तो 100 साल की आयु में भी अनेको स्त्रियों के साथ रमण कर सकेंगे। कमज़ोरी नाम क्या होता हैं सब भूल जायेंगे।
योग-
सामान
सफ़ेद प्याज अथवा लाल प्याज माध्यम आकार के 30 नग
शुद्ध शहद – आवश्यकतानुसार
विधि
सर्वप्रथम सफ़ेद प्याज का छिलका उतार लीजिये, अब इन प्याज में किसी सलाई की मदद से बीच बीच में 8-10 छेद कर दीजिये। सभी प्याज में ऐसे छेद कर लीजिये। और इन सब प्याज को एक कांच के बर्तन में डालकर रख लीजिये। कांच का बर्तन तीन चौथाई तक भरे। अब इस बर्तन को शुद्ध शहद से पूरा भर दीजिये। इसको 45 दिन तक किसी ठन्डे स्थान पर हल्का ढक कर रख लीजिये, ताकि इस पर फफूंद ना लगे । 45 दिन बाद आपका बेजोड़ यौन शक्ति वर्धक उपाय तैयार हो जायेगा।






विशेष
ध्यान रहे के बर्तन पूरा भरना है – अगर बर्तन खाली रहा तो ये खराब होने का खतरा है. और अगर सफ़ेद प्याज ना मिले तो इसकी जगह लाल प्याज भी काम में लिया जा सकता है. और इसको बनने के बाद इसको 45 दिन में खत्म करना ही हैं नहीं तो ये ख़राब हो जायेगा. और बनने के बाद इसको आप फ्रिज वगरह में रख दीजिये|
नियमित सेवन के लिए 45 दिन बाद आप ऐसा ही नया जार तैयार कर लीजिये।सेवन विधि
अभी हर रोज़ रात को सोने से १ घंटा पहले ये बना हुआ मुरब्बा एक नग खा लीजिये। इसको निरंतर खाने से आप में घोड़े से भी ज़्यादा बल आ जाएगा। शरीर में खून की आपूर्ति हो जाएगी। चेहरा लाल टमाटर जैसा खिल जायेगा। और बुढ़ापे का अनुभव तो कभी नहीं होगा। सदा जवान रहेंगे।
सावधानी
खट्टी चीजो, फ़ास्ट फ़ूड, कोल्ड ड्रिंक्स, धूम्रपान, शराब आदि का सेवन ना करे। इस प्रयोग का सम्पूर्ण फायदा लेने के लिए प्रयोग काल के प्रथम 25 दिन सम्भोग नहीं करना। उसके बाद भले निरंतर सम्भोग करते रहे। इस से ऐसी ताक़त मिलेगी जिसके आगे सब दवाये फेल हैं। और मन सदैव शांत रखे, हमेशा स्त्री गमण के बारे में सोचने से धातु कमज़ोर होती हैं और शक्ति का नाश होता हैं। अधिक सहवास करना सेहत के लिए नुकसानदेह हैं। शरीर से ओज तेज़ का नाश होता हैं। ये प्रयोग उन लोगो के लिए ही बताया हैं जो लोग अपनी शादी शुदा ज़िंदगी से परेशान हैं और बचपन की गलतियों की वजह से अपना जीवन नरक समान बना लिया हैं।

16.10.16

अनिद्रा का चमत्कारी ईलाज




रात को सोने से पहले इस जादुई औषधि का एक चमच मुह में रखिये और फिर इसका कमाल देखें !
रात को सोने से पहले इस जादुई औषधि का एक चमच मुह में रखिये और फिर इसका कमाल देखें 

आधी रात में नींद खुल जाना या नींद न आना बहुत ही कष्टदायक और निराशा जनक होता है और दुःख की बात ये है कि आज कल हर कोई इस बीमारी से पीड़ित है आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में इतना ज्यादा दिमागी तनाव बढ़ गया है की दिमाग को रिलेक्स करने का मौका नही मिलता जिसकी वजह से बहुत सी बीमारिया पैदा हो जाती है इन्ही में से एक है अनिद्रा या नींद न आने की बीमारी
तो इसलिए आज हम आप के लिए एक ऐसा नुस्खा लेकर आये है जो आपको इस बीमारी से मुक्ति दिल सकता है और आप आराम से सो सकते है और इसमे जो चीजो का इस्तेमाल होता है वो आपकी रसोई में आसानी से उपलब्ध है वो है नमक और चीनी
 


ये दोनों शरीर में हार्मोन्स को नियंत्रित करते है और कोशिकाओं द्वारा भोजन के पाचन में मदद करते है ये सेल चार्ज के रूप में कार्य के रूप में गुल्कोज माइटोकांडिरया के लिए आवश्यक है ये शरीर को ऊर्जा और सोडियम बैलेंस करने में मददगार है
इसके आलावा शकर शरीर के लिए एक संदेश भेजता है की यह अब तनाव हार्मोन्स रिलीज करने की जरूरत नही है और नामक एक होम्योस्टेटिक स्थिति को बनाये रखते है एर्डेनाइल के नियंत्रण के द्वारा

आइये अब जानते है इस मिश्रण को बनाने का तरीका
सामग्री
2 Tablespoons Pure Pink Himalayan Sea Salt
2 Tablespoons Organic Brown sugar
5 Tablespoons Honey

विधि
इन सभी औषधियों को एक कांच की बर्तन में भरकर अच्छी तरह मिला लीजिये और सोने से पहले एक चम्मच अपने मुँह में डाल ले आपको अच्छी नींद आएगी

नोट :- जिन लोगो को शुगर या बी पी की प्रोब्लेम्स है वो इसका सेवन ना करे

30.9.16

नींद नहीं आने (निद्राल्पता) की होम्योपैथिक औषधियाँ

अच्छी सेहत के लिए सिर्फ प्रॉपर डाइट लेना ही काफी नहीं है। अच्छी नींद भी हेल्दी रहने के लिए उतनी ही जरूरी है। आजकल कई प्रफेशन में डिफरेंट शिफ्ट्स में काम होता है। ऐसे में सबसे ज्यादा नींद पर असर पड़ता है। कई बार तो ऐसा होता है कि टुकड़ों में नींद पूरी करनी पड़ती है, लेकिन छोटी-छोटी नैप लेना सेहत के लिहाज से बेहद खराब होता है। एक रिसर्च के मुताबिक, खराब नींद यानि छोटे-छोटे टुकड़ों में ली गई नींद बिल्कुल न सोने से भी ज्यादा खतरनाक होती है। इससे कई तरह की बीमारियां शरीर को शिकार बना सकती हैं।
टुकड़ों में सोने वाले लोग सुबह उठकर भी फ्रेश नहीं फील करते हैं। रिसर्च में यह साबित हो चुका है। अमेरिका के जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अपने शोध में दो तरह की नींद का अध्ययन किया है। इसमें रुकावट के साथ सोने वाली नींद और कम समय के लिए ही सही लेकिन शांति वाली नींद शामिल है। इन लोगों के मिजाज को जब कंपेयर किया गया तो पाया कि टुकड़ों में सोने वाले लोगों की तुलना में शांति से सोने वाले लोगों का मूड बेहतर था।
खराब नींद किडनी पर भी बुरा असर डालती है। शरीर में ज्यादातर प्रोसेस नैचरल डेली रिद्म (सरकाडियन क्लॉक या शरीर की प्राकृतिक घड़ी) के आधार पर होते हैं। ये हमारी नींद से ही कंट्रोल होता है। एक रिसर्च के मुताबिक जब सोने की साइकल बिगड़ती है तो किडनी को नुकसान होता है। इससे किडनी से जुड़ी कई बीमारियां हो सकती हैं।
आधी-अधूरी नींद दिल के लिए भी खतरे की घंटी है। इससे हार्ट डिजीज होने के चांस तो बढ़ते ही हैं, साथ ही दिल का दौरा भी पड़ सकता है। एक रिसर्च में खराब नींद की शिकायत करने वालों में अच्छी नींद लेने वालों के मुकाबले 20 फीसदी ज्यादा कोरोनरी कैल्शियम पाया गया।
कम नींद लेने से दिमाग सही तरह से काम नहीं कर पाता है। इसका सीधा असर हमारी याद‌्‌दाश्त पर पड़ता है। इसके अलावा, पढ़ने, सीखने व डिसीजन लेने की क्षमताएं भी इफेक्ट होती हैं। खराब नींद से स्ट्रेस लेवल भी बढ़ता है और इमोशनली वीक लोग डिप्रेशन के भी शिकार हो सकते हैं।
होम्योपैथिक उपचार में प्रयुक्त विभिन्न औषधियों से चिकित्सा–
नींद लाने के लिए बार-बार कॉफिया औषधि का सेवन करना होम्योपैथी चिकित्सा नहीं है, हां यदि नींद न आना ही एकमात्र लक्षण हो दूसरा कोई लक्षण न हो तब इस प्रकार की औषधियां लाभकारी है जिनका नींद लाने पर विशेष-प्रभाव होता है- कैल्केरिया कार्ब, सल्फर, फॉसफोरस, कॉफिया या ऐकानाइट आदि।
 काक्युलस- यदि रात के समय में अधिक जागने के कारण से नींद नहीं आ रही हो तो ऐसे रोगी के इस लक्षण को दूर करने के लिए काक्युलस औषधि की 3 से 30 शक्ति का उपयोग करना चाहिए। जिन लोगों का रात के समय में जागने का कार्य करना होता है जैसे-चौकीदार, नर्स आदि, उन्हें यदि नींद न आने की बीमारी हो तो उनके के लिए कौक्युलस औषधि का उपयोग करना फायदेमंद है। यदि नींद आने पर कुछ परेशानी हो और इसके कारण से चक्कर आने लगें तो रोग को ठीक करने के लिए कौक्युलस औषधि का उपयोग करना उचित होता है।
 सल्फर – रोगी की नींद बार-बार टूटती है, जारा सी भी आवाजें आते ही नींद टूट जाती है, जब नींद टूटती है तो रोगी उंघाई में नहीं रहता, एकदम जाग जाता है, रोगी की नींद कुत्ते की नींद के समान होती है। रोगी के शरीर में कहीं न कहीं जलन होती है, अधिकतर पैरों में जलन होती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए सल्फर औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना फायदेमंद होता है।


 नक्स वोमिका – रोगी का मस्तिष्क इतना कार्य में व्यस्त रहता है कि वह रात भर जागा रहता है, व्यस्त मस्तिष्क के कारण नींद न आ रही हो, मन में विचारों की भीड़ सी लगी हो, आधी रात से पहले तो नींद आती ही नहीं यादि नींद आती भी है तो लगभग तीन से चार बजे नींद टूट जाती है। इसके घंटे बाद जब वह फिर से सोता है तो उठने पर उसे थकावट महसूस होती है, ऐसा लगता है कि मानो नींद लेने पर कुछ भी आराम न मिला हो। ऐसे लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए नक्स वोमिका औषधि का उपयोग कर सकते हैं।
किसी रोगी को आधी रात से पहले नींद नहीं आती हो, शाम के समय में नींद नहीं आती हो और तीन या चार बजे नींद खुल जाती हो, इस समय वह स्वस्थ अनुभव करता है लेकिन नींद खुलने के कुछ देर बाद उसे फिर नींद आ घेरती है और तब नींद खुलने पर वह अस्वस्थ अनुभव करता है, इस नींद के बाद तबीयत ठीक नहीं रहती। ऐसे रोगी के रोग को ठीक करने के लिए नक्स वोमिका औषधि का उपयोग करना चाहिए।
कब्ज बनना, पेट में कीड़ें होना, अधिक पढ़ना या अधिक नशा करने के कारण से नींद न आए तो इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए नक्स वोमिका औषधि की 6 या 30 शक्ति का सेवन करने से अधिक लाभ मिलता है।
.पल्स रोगी शाम के समय में बिल्कुल जागे हुए अवस्था में होता है, दिमाग विचारों से भरा हो, आधी रात तक नींद नहीं आती, बेचैनी से नींद बार-बार टूटती है, परेशान भरे सपने रात में दिखाई देते हैं, गर्मी महसूस होती है, उठने के बाद रोगी सुस्त तथा अनमाना स्वभाव का हो जाता है। आधी रात के बाद नींद न आना और शाम के समय में नींद के झोकें आना, रोगी का मस्तिष्क व्यस्त हो अन्यथा साधारण तौर पर तो शाम होते ही नींद आती है और 3-4 बजे नींद टूट जाती है, इस समय रोगी रात को उठकर स्वस्थ अनुभव करता है, यह इसका मुख्य लक्षण है-शराब, चाय, काफी से नींद न आए। ऐसी अवस्था में रोगी को पल्स औषधि का सेवन कराना चाहिए।
सेलेनियम – रोगी की नींद हर रोज बिल्कुल ठीक एक ही समय पर टूटती है और नींद टूटने के बाद रोग के लक्षणों में वृद्धि होने लगती है। इस प्रकार के लक्षण होने पर रोगी का उपचार करने के लिए सेलेनियम औषधि का उपयोग कर सकते हैं।
ऐम्ब्राग्रीशिया – रोगी अधिक चिंता में पड़ा रहता है और इस कारण से वह सो नहीं पाता है, वह जागे रहने पर मजबूर हो जाता है। व्यापार या कोई मानसिक कार्य की चिंताए होने से नींद आने में बाधा पड़ती है। सोने के समय में तो ऐसा लगता है कि नींद आ रही है लेकिन जैसे ही सिर को तकिए पर रखता है बिल्कुल भी नींद नहीं आती है। इस प्रकार की अवस्था उत्पन्न होने पर रोग को ठीक करने के लिए ऐम्ब्राग्रीशिया औषधि की 2 या 3 शक्ति का उपयोग करना लाभदायक होता है। इस औषधि का उपयोग कई बार करना पड़ सकता है।
फॉसफोरस – रोगी को दिन के समय में नींद आती रहती है, खाने के बाद नींद नहीं आती लेकिन रात के समय में नींद बिल्कुल भी नहीं आती है। ऐसे लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए फॉसफोरस औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना फायदेमंद होता है।
वृद्ध-व्यक्तियों को नींद न आ रही हो तो ऐसे रोगी के रोग को ठीक करने के लिए सल्फर औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना चाहिए।
आग लगने या संभोग करने के सपने आते हों और नींद देर से आती हो तथा सोकर उठने के बाद कमजोरी महसूस होता हो तो इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए फॉसफोरस औषधि का उपयोग किया जा सकता है।
रोगी को धीरे-धीरे नींद आती है और रात में कई बार जाग पड़ता है, थोड़ी नींद आने पर रोगी को बड़ा आराम मिलता है, रोगी के रीढ़ की हड्डी में जलन होती है और रोग का अक्रमण अचानक होता है। ऐसे रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए फॉसफोरस औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना अधिक लाभकारी है।
टैबेकम- यदि स्नायविक-अवसाद (नर्वस ब्रेकडाउन) के कारण से अंनिद्रा रोग हुआ हो या हृदय के फैलाव के कारण नींद न आने के साथ शरीर ठंडा पड़ गया हो, त्वचा चिपचिपी हो, घबराहट हो रही हो, जी मिचलाना और चक्कर आना आदि लक्षण हो तो रोग को ठीक करने के लिए टैबेकम औषधि की 30 शक्ति का सेवन करने से अधिक लाभ मिलता है।


ऐवैना सैटाइवा – स्नायु-मंडल पर ऐवैना सैटाइवा औषधि का लाभदायक प्रभाव होता है। ऐवैना सैटाइवा जई का अंग्रेजी नाम है। जई घोड़ों को ताकत के लिए खिलाई जाती है जबकि यह मस्तिष्क को ताकत देकर अच्छी नींद लाती है। कई प्रकार की बीमारियां शरीर की स्नायु-मंडल की शक्ति को कमजोर कर देती है जिसके कारण रोगी को नींद नहीं आती है। ऐसी स्थिति में ऐवैना सैटाइवा औषधि के मूल-अर्क के 5 से 10 बूंद हल्का गर्म पानी के साथ लेने से स्नायुमंडल की शक्ति में वृद्धि होती है जिसके परिणाम स्वरूप नींद भी अच्छी आने लगती है। अफीम खाने की आदत को छूड़ाने के लिए भी ऐवैना सैटाइवा औषधि का उपयोग किया जा सकता है।
स्कुटेलेरिया – यदि किसी रोगी को अंनिद्रा रोग हो गया हो तथा सिर में दर्द भी रहता हो, दिमाग थका-थका सा लग रहा हो, अपनी शक्ति से अधिक काम करने के कारण उसका स्नायु-मंडल ठंडा पड़ गया हो तो ऐसे रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए स्कुटेलेरिया औषधि का प्रयोग आधे-आधे घंटे के बाद इसके दस-दस बूंद हल्का गर्म पानी के साथ देते रहना चाहिए, इससे अधिक लाभ मिलेगा।
सिप्रिपीडियम – अधिक खुशी का सामाचार सुनकर जब मस्तिष्क में विचारों की भीड़ सी लग जाए और इसके कारण से नींद न आए या जब छोटे बच्चे रात के समय में उठकर एकदम से खेलने लगते हैं और हंसते रहते हैं और उन्हें नींद नहीं आती है। ऐसे रोगियों के अनिद्रा रोग को ठीक करने के लिए सिप्रिपीडियम औषधि के मूल-अर्क के 30 से 60 बूंद दिन में कई बार हल्का गर्म पानी के साथ सेवन कराना चाहिए। रात में अधिक खांसी होने के कारण से नींद न आ रही हो तो सिप्रिपीडियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए जिसके फलस्वरूप खांसी से आराम मिलता है और नींद आने लगती है।
कैमोमिला – दांत निकलने के समय में बच्चों को नींद न आए और जंहाई आती हो और बच्चा औंघता रहता हो लेकिन फिर भी उसे नींद नहीं आती हो, उसे हर वक्त अनिद्रा और बेचैनी बनी रहती है। ऐसे रोगियों के इस रोग को ठीक करने के लिए कैमोमिला औषधि की 12 शक्ति का सेवन कराने से अधिक लाभ मिलता है।
लाइकोडियम- दोपहर के समय में भोजन करने के बाद नींद तेज आ रही हो और नींद खुलने के बाद बहुत अधिक सुस्ती महसूस हो तो इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए लाइकोडियम औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना लाभदायक होता है।
चायना- रक्त-स्राव या दस्त होने के कारण से या शरीर में अधिक कमजोरी आ जाने की वजह से नींद न आना या फिर चाय पीने के कारण से अनिद्रा रोग हो गया हो तो उपचार करने के लिए चायना औषधि 6 या 30 शक्ति का उपयोग करना लाभदायक है।
कैल्केरिया कार्ब – इस औषधि की 30 शक्ति का उपयोग दिन में तीन-तीन घंटे के अंतराल सेवन करने से रात के समय में नींद अच्छी आने लगती है। यह नींद किसी प्रकार के नशा करने के समान नहीं होती बल्कि स्वास्थ नींद होती है।
कॉफिया – खुशी के कारण नींद न आना, लॉटरी या कोई इनाम लग जाने या फिर किसी ऐसे समाचार सुनने से मन उत्तेजित हो उठे और नींद न आए, मस्तिष्क इतना उत्तेजित हो जाए कि आंख ही बंद न हो, मन में एक के बाद दूसरा विचार आता चला जाए, मन में विचारों की भीड़ सी लग जाए, मानसिक उत्तेजना अधिक होने लगे, 3 बजे रात के बाद भी रोगी सो न पाए, सोए भी तो ऊंघता रहें, चौंक कर उठ बैठे, नींद आए भी ता स्वप्न देखें। इस प्रकार के लक्षण रोगी में हो तो उसके इस रोग का उपचार करने के लिए कॉफिया औषधि की 200 शक्ति का उपयोग करना चाहिए। यह नींद लाने के लिए बहुत ही उपयोगी औषधि है। यदि गुदाद्वार में खुजली होने के कारण से नींद न आ रही हो तो ऐसी अवस्था में भी इसका उपयोग लाभदायक होता है। रोगी के अनिद्रा रोग को ठीक करने के लिए कॉफिया औषधि की 6 या 30 शक्ति का उपयोग करना लाभदायक होता है।
जेल्सीमियम – यदि उद्वेगात्मक-उत्तेजना (इमोशनल एक्साइटमेंट) के कारण से नींद न आती हो तो जेल्सीमियम औषधि के सेवन से मन शांत हो जाता है और नींद आ जाती है। किसी भय, आतंक या बुरे समाचार के कारण से नींद न आ रही हो तो जेल्सीमियम औषधि से उपचार करने पर नींद आने लगती है। बुरे समाचार से मन के विचलित हो जाने पर उसे शांत कर नींद ले आते हैं। अधिक काम करने वाले रोगी के अनिंद्रा रोग को ठीक करने के लिए जेल्सीमियम औषधि का उपयोग करना चाहिए। ऐसे रोगी जिनकों अपने व्यापार के कारण से रात में अधिक बेचैनी हो और नींद न आए, सुबह के समय में उठते ही और कारोबार की चिंता में डूब जाते हो तो ऐसे रोगियों के इस रोग को ठीक करने के लिए जेल्सीमियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए।
ऐकोनाइट – बूढ़े-व्यक्तियों को नींद न आ रही हो तथा इसके साथ ही उन्हें घबराहट हो रही हो, गर्मी महसूस हो रही हो, चैन से न लेट पाए, करवट बदलते रहें। ऐसे बूढ़े रोगियों के इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए ऐकोनाइट औषधि की 30 का उपयोग करना लाभकारी है। यह औषधि स्नायु-मंडल को शांत करके नींद ले आती है। किसी प्रकार की बेचैनी होने के कारण से नींद न आ रही हो तो रोग को ठीक करने के लिए ऐकोनाइट औषधि का उपयोग करना फायदेमंद होता है।


कैम्फर – नींद न आने पर कैम्फर औषधि के मूल-अर्क की गोलियां बनाकर, घंटे आधे घंटे पर इसका सेवन करने से नींद आ जाती है।
इग्नेशिया – किसी दु:ख के कारण से नींद न आना, कोई सगे सम्बंधी की मृत्यु हो जाने से मन में दु:ख अधिक हो और इसके कारण से नींद न आना। इस प्रकार के लक्षण से पीड़ित रोगी को इग्नेशिया औषधि की 200 शक्ति का सेवन करना चाहिए। यदि किसी रोगी में भावात्मक या भावुक होने के कारण से नींद न आ रही हो तो उसके इस रोग का उपचार इग्नेशिया औषधि से करना लाभदायक होता है। हिस्टीरिया रोग के कारण से नींद न आ रही हो तो रोग का उपचार करने के लिए इग्नेशिया औषधि की 200 शक्ति का उपयोग करना फायदेमंद होता है। यदि रोगी को नींद आ भी जाती है तो उसे सपने के साथ नींद आती है, देर रात तक सपना देखता रहता है और रोगी अधिक परेशान रहता है। नींद में जाते ही अंग फड़कते हैं नींद बहुत हल्की आती है, नींद में सब-कुछ सुनाई देता है और उबासियां लेता रहता है लेकिन नींद नहीं आती है। ऐसे रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए इग्नेशिया औषधि का उपयोग करना उचित होता है। मन में दु:ख हो तथा मानसिक कारणों से नींद न आए और लगातार नींद में चौक उठने की वजह से नींद में गड़बड़ी होती हो तो उपचार करने के लिए इग्नेशिया औषधि की 3 या 30 शक्ति का उपयोग करना लाभकारी है।
बेलाडोना – मस्तिष्क में रक्त-संचय होने के कारण से नींद न आने पर बेलाडोना औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना चाहिए। रोगी के मस्तिष्क में रक्त-संचय (हाइपरमिया) के कारण से रोगी ऊंघता रहता है लेकिन मस्तिष्क में थाकवट होने के कारण से वह सो नहीं पाता। ऐसे रोगी के रोग का उपचार करने के लिए के लिए भी बेलाडोना औषधि उपयोगी है। रोगी को गहरी नींद आती है और नींद में खर्राटें भरता है, रोगी सोया तो रहता है लेकिन उसकी नींद गहरी नहीं होती। रोगी नींद से अचानक चिल्लाकर या चीखकर उठता है, उसकी मांस-पेशियां फुदकती रहती हैं, मुंह भी लगतार चलता रहता है, ऐसा लगता है मानो वह कुछ चबा रहा हो, दांत किटकिटाते रहते हैं। इस प्रकार के लक्षण होने के साथ ही रोगी का मस्तिष्क शांत नहीं रहता। जब रोगी को सोते समय से उठाया जाता है तो वह उत्तेजित हो जाता है, अपने चारों तरफ प्रचंड आंखों (आंखों को फाड़-फाड़कर देखना) से देखता है, ऐसा लगता है कि मानो वह किसी पर हाथ उठा देगा या रोगी घबराकर, डरा हुआ उठता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए बेलाडोना औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना लाभकारी है। अनिद्रा रोग को ठीक करने के लिए कैमोमिला औषधि का उपयोग करने पर लाभ न मिले तो बेलाडोना औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करें।
बेल्लिस पेरेनस यदि किसी रोगी को सुबह के तीन बजे के बाद नींद न आए तो बेल्लिस पेरेन्निस औषधि के मूल-अर्क या 3 शक्ति का उपयोग करना लाभकारी है।
कैनेबिस इंडिका- अनिद्रा रोग (ओब्सीनेट इंसोम्निया) अधिक गंभीर हो और आंखों में नींद भरी हुई हो लेकिन नींद न आए। इस प्रकार के लक्षण यदि रोगी में है तो उसके इस रोग को ठीक करने के लिए कैनेबिस इंडिका औषधि के मूल-अर्क या 3 शक्ति का उपयोग करना फायदेमंद है। इस प्रकार के लक्षण होने पर थूजा औषधि से भी उपचार कर सकते हैं।
पल्सेटिला- रात के समय में लगभग 11 से 12 बजे नींद न आना। इस लक्षण से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए पल्सेटिला औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना चाहिए।
सिमिसि- यदि स्त्रियों के वस्ति-गन्हर की गड़बड़ी के कारण से उन्हें अनिद्रा रोग हो तो उनके इस रोग का उपचार करने के लिए सिमिसि औषधि की 3 शक्ति का उपयोग किया जाना चाहिए।
साइना- पेट में कीड़ें होने के कारण से नींद न आने पर उपचार करने के लिए साइना औषधि की 2x मात्रा या 200 शक्ति का उपयोग करना लाभदाक है।
पैसिफ्लोरा इंकारनेट- नींद न आने की परेशानी को दूर करने के लिए यह औषधि अधिक उपयोगी होती है। उपचार करने के लिए इस औषधि के मल-अर्क का एक बूंद से 30 बूंद तक उपयोग में लेना चाहिए।

26.9.16

नारियल तेल के ऐसे अद्भुत प्रयोग नहीं जानते होंगे आप ....

नारियल तेल के 
ऐसे अद्भुत प्रयोग
 नहीं जानते होंगे 
आप 


लंबे और घने बालों के लिए अगर आपकी दादी मां के जमाने से आप नारियल तेल का इस्तेमाल करते आ रहे हैं तो इसके कई ऐसे फायदे जानें जो अलग-अलग मामलों में आपके लिए मददगार हो सकते हैं
जानिए, नारियल तेल के चौंकाने वाले 7 फायदों के बारे में जिनका इस्तेमाल कई मामलों में फायदेमंद हो सकता है।
बाथरूम में शावर, नल जैसे उपकरणों को साफ करने के लिए कपड़े में नारियल तेल लगाकर उससे स्क्रब करने से वे चमक उठते हैं।
नारियल तेल के इस्तेमाल से आप पसीने की बदबू से दिन भर दूर रह सकते हैं। छह चम्मच नारियल तेल में एक चौथाई कप बेकिंग सोडा मिलाएं, एक चौथाई कप आरारोट व कुछ बूंद यूकोलिपटस या मिंट ऑयल मिलाएं और एक जार में बंद करके रख दें।
बच्चों को अधिक देर तक डायपर पहनाने के बाद उनकी त्वचा को रूखा होने से बचाने के लिए इससे सुरक्षित, 

सस्ता व असरदार विकल्प भला क्या होगा।
शेविंग के लिए अब शेविंग क्रीम का पैसा बचा सकते हैं। त्वचा को गीला कर उसपर नारियल तेल लगाएं और उसपर रेज़र चलाएं।
नारियल तेल में बने या तले भोजन के सेवन से लंबे समय तक भूख नहीं लगती हैं। यह मीडियम सैचुरेटेड फैटी एसिड से युक्त है जो लंबे समय तक भूख शांत रखने में मददगार है।
इससे न सिर्फ शेविंग सही तरह से होती है बल्कि रेजर बर्न और ड्राइ स्किन से बचाता है।
बाजार में बिकने वाले माउथवॉश में मौजूद एल्कोहल या फ्लूराइड जैसे रसायन नुकसानदायक हो सकते हैं। ऐसे में आयुर्वेद में नारियल तेल के कुल्ले का बहुत महत्व है। मुंह में नारियल तेल भर इसके कुल्ले करने से बैक्टीरिया दूर रहेंगे।

नारियल तेल में विटामिन ई का कैपसूल मिलाकर रात में चेहरे पर झुर्रियों वाले हिस्से में लगाएं और सुबह पानी से धो लें। इससे त्वचा में कसाव आता है और झुर्रियां कम होती हैं।

18.9.16

बच्चों मे खून की कमी के उपचार



रक्ताल्पता या खून की कमी : खून का कार्य शरीर के हर भाग में भोजन और आक्सीजन पहुंचाना और वहां से अनावश्यक पदार्थों को मूत्र द्वारा विसर्जित करना है। अत: रक्त संबंधी किसी भी विकार से शरीर की सामान्य गतिविधियों पर गहरा असर पड़ता है।
खून में लाल रक्त की पेशियां होती हैं जिनका प्रमुख कार्य स्नायुओं को आक्सीजन पहुंचाना है, उनके भीतर हीमोग्लोबिन नामक पदार्थ मौजूद होता है जिससे खून को लाल रंग प्राप्त होता है और जब भी इन लाल कोशिकाओं की कमी हो जाती है, एनीमिया या रक्ताल्पता हो जाती है।
लक्षण : एनीमिया को जानने का सबसे आसान उपाय है कि आप बच्चों के होंठों की भीतरी त्वचा, आंखों की भीतरी त्वचा, उसकी हथेलियों और नाखूनों का रंग देखें। आमतौर पर गुलाबी रहने वाले इन भागों का रंग इस रोग के कारण सफेद या पीला दिखाई देता है। रोग की तीव्रता का निदान खून की जांच द्वारा किया जा सकता है। यह इस बात को दर्शाएगा कि रोग का कारण क्या है।
क्यों होता है एनीमिया? : बच्चों में इसका प्रमुख कारण है लौह तत्वों की कमी। निर्धारित वक्त से पहले जन्मे 

बच्चों में यह अधिक पाया गया है।  
छह माह से अधिक उम्र के बच्चों में इस बीमारी का कारण उनके आहार में लौह तत्वों की कमी है।
दूध में लौह तत्व अल्प मात्रा में मौजूद होते हैं। अत: यह जरूरी है कि चार से छह माह के बच्चों को दूध के अतिरिक्त अन्य ठोस आहार भी दिया जाए। इसी तरह जिन बच्चों में बार-बार किसी रोग का संक्रमण होता है उन्हें भी इस रोग से पीड़ित होने का भय होता है। इसी तरह जन्मजात विकार, वंशानुगत बीमारी, पेट में कृमि और अन्य बीमारियों द्वारा रक्त क्षय भी इस बीमारी को जन्म दे सकता है।
उपचार : लौह तत्वों का प्रचुर मात्रा में सेवन इस बीमारी का सीधा और सरल उपचार है। छोटी आयु के बच्चों को यह औषधि के द्वारा दिया जा सकता है। उसी तरह जो बच्चे ठोस आहार लेने में सक्षम हैं, उन्हें अंडे, हरी सब्जी और टमाटर अधिक मात्रा में सेवन कराना चाहिए। यदि रक्ताल्पता की तीव्रता अधिक हो तो लौह तत्व युक्त दवाओं का भी प्रयोग किया जा सकता है।
                                                      
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8.9.16

हाथ -पैर व अंग सुन्न हो जाने के उपचार


कभी-कभी बैठे-बैठे या काम करते हुए शरीर का कोई अंग या त्वचा सुन्न हो जाती है| कुछ लोग देर तक एक ही मुद्रा में बैठकर काम करते या पढ़ते-लिखते रहते हैं| इस कारण रक्तवाहिनीयों तथा मांसपेशियों में शिथिलता आ जाने से शरीर सुन्न हो जाता है|
शरीर के अंग सुन्‍ना पड़ जाना एक आम सी समस्‍या है। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे लगातार हाथों और पैरों पर प्रेशर, किसी ठंडी चीज को बहुत देर तक छूते रहना, तंत्रिका चोट, बहुत अधिक शराब का सेवन, थकान, धूम्रपान, मधुमेह, विटामिन या मैग्‍नीशियम की कमी आदि।
शरीर के किसी अंग के सुन्न होने का प्रमुख कारण वायु का कुपित होना है| इसी से वह अंग भाव शून्य हो जाता है| लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि खून के संचरण में रुकावट पैदा होने से सुन्नता आती है| यदि शरीर के किसी विशेष भाग को पूरी मात्रा में शुद्ध वायु नहीं मिलती तो भी शरीर का वह भाग सुन्न पड़ जाता है|
जो अंग सुन्न हो जाता है, उसमें हल्की झनझनाहट होती है| उसके बाद लगता है कि वह अंग सुन्न हो गया है| सुई चुभने की तरह उस अंग में धीरे-धीरे लपकन-सी पड़ती है, लेकिन दर्द नहीं मालूम पड़ता|
अगर यह समस्‍या कुछ मिनटों तक रहती है तो कोई परेशानी की बात नहीं है लेकिन अगर यही कई कई घंटों तक बनी रहे तो आपको डॉक्‍टर के पास जाने की आवश्‍यकता है। हो सकता है कि किसी बड़ी बीमारी का लक्षण हो।हाथ पैर का सुन्‍न हो जाना बड़ा ही कष्‍टदायक होता है क्‍योंकि ऐसे में फिर आपका कहीं मन नहीं लगता। पर आप चाहें तो इस समस्‍या को घरेलू उपचार से ठीक कर सकते हैं।
कभी-कभी बैठे-बैठे या काम करते हुए शरीर का कोई अंग या त्वचा सुन्न हो जाती है| कुछ लोग देर तक एक ही मुद्रा में बैठकर काम करते या पढ़ते-लिखते रहते हैं| इस कारण रक्तवाहिनीयों तथा मांसपेशियों में शिथिलता आ जाने से शरीर सुन्न हो जाता है|

शरीर सुन्न हो जाने का कारण
शरीर के किसी अंग के सुन्न होने का प्रमुख कारण वायु का कुपित होना है| इसी से वह अंग भाव शून्य हो जाता है| लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि खून के संचरण में रुकावट पैदा होने से सुन्नता आती है| यदि शरीर के किसी विशेष भाग को पूरी मात्रा में शुद्ध वायु नहीं मिलती तो भी शरीर का वह भाग सुन्न पड़ जाता है|

शरीर सुन्न हो जाने की पहचान
जो अंग सुन्न हो जाता है, उसमें हल्की झनझनाहट होती है| उसके बाद लगता है कि वह अंग सुन्न हो गया है| सुई चुभने की तरह उस अंग में धीरे-धीरे लपकन-सी पड़ती है, लेकिन दर्द नहीं मालूम पड़ता|
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शरीर सुन्न हो जाने के घरेलु नुस्खे इस प्रकार हैं:

पपीता और सरसों-
पपीते या शरीफे के बीजों को पीसकर सरसों के तेल में मिलाकर सुन्न होने वाले अंगों पर धीरे-धीरे मालिश करें|
सोंठ, लहसुन और पानी-
सुबह के समय शौच आदि से निपट कर सोंठ तथा लहसुन की दो कलियों को चबाकर ऊपर से पानी पी लें| यह प्रयोग आठ-दस दिनों तक लगातर करने से सुन्न स्थान ठीक हो जाता है|
अजवायन, लहसुन और तिली तेल-
तिली के तेल में एक चम्मच अजवायन तथा लहसुन की दो पूतियां कुचलकर डालें| फिर तेल को पका-छानकर शीशी में भर लें| इस तेल से सुन्न स्थान की मालिश करें|
बादाम-
बादाम का तेल मलने से सुन्न स्थान ठीक हो जाता है|
पीपल और सरसों-
पीपल के पेड़ की चार कोंपलें सरसों के तेल में मिलाकर आंच पर पकाएं| फिर छानकर इस तेल को काम में लाएं|
सोंठ, पीपल, लहसुन और पानी-



सोंठ, पीपल तथा लहसुन - सभी बराबर की मात्रा में लेकर सिल पर पानी के साथ पीस लें| फिर इसे लेप की तरह सुन्न स्थान पर लगाएं|
बादाम-
बादाम घिसकर लगाने से त्वचा स्वाभाविक हो जाती है|
कालीमिर्च और इलायची-
कालीमिर्च तथा लाल इलायची को पानी में पीसकर त्वचा पर लगाएं|
नारियल और जायफल-
100 ग्राम नारियल के तेल में 5 ग्राम जायफल का चूर्ण मिलाकर त्वचा या अंग विशेष पर लगाएं|
लहसुन और पानी-
एक गांठ लहसुन और एक गांठ शुंठी पीस लें| इसके बाद पानी में घोलकर लेप बना लें| इस लेप को त्वचा पर लगाएं|
 


दालचीनी-
दालचीनी में कैमिकल और न्‍यूट्रियंट्स होते हैं जो हाथ और पैरों में ब्‍लड फ्लो को बढ़ाते हैं। एक्‍सपर्ट बताते हैं रोजाना 2-4 ग्राम दालचीनी पावडर को लेने से ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ता है। इसको लेने का अच्‍छा तरीका है कि एक गिलास गरम पानी में 1 चम्‍मच दालचीनी पावडर मिलाएं और दिन में एक बार पियें। दूसरा तरीका है कि 1 चम्‍मच दालचीनी और शहद मिला कर सुबह कुछ दिनों तक सेवन करें।
घी-
रात को सोते समय तलवों पर देशी घी की मालिश करें| इससे पैर का सुन्नपन खत्म हो जाएगा|
चोपचीनी, पीपरामूल, मक्खन और दूध
5 ग्राम चोपचीनी, 2 ग्राम पीपरामूल और 4 ग्राम मक्खन - तीनों को मिलाकर सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करें|
बेल, पीपल, चित्रक और दूध
बेल की जड़, पीपल और चित्रक को बराबर की मात्रा में लेकर आधा किलो दूध में औटाएं| फिर रात को सोते समय उसे पी जाएं|

. व्‍यायाम-
व्‍यायाम करने से शरीर में ब्‍लड र्स्‍कुलेशन होता है और वहां पर ऑक्‍सीजन की मात्रा बढ़ती है। रोजाना हाथ और पैरों का 15 मिनट व्‍यायाम करना चाहिये। इसके अलावा हफ्ते में 5 दिन के लिये 30 मिनट एरोबिक्‍स करें, 


जिससे आप हमेशा स्‍वस्‍थ बने रहें।
हल्‍दी-
हल्‍दी में ऐसे तत्‍व पाए जाते हैं जो ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ाते हैं। साथ ही यह सूजन, दर्द और परेशानी को भी कम करती है। एक गिलास दूध में 1 चम्‍मच हल्‍दी मिक्‍स कर के हल्‍की आंच पर पकाएं। आप इसमें हल्‍दी भी मिला सकते हैं। इसे पीने से काफी राहत मिलेगी। आप हल्‍दी और पानी के पेस्‍ट से प्रभावित स्‍थान की मसाज भी कर सकते हैं।
गरम पानी का सेंक-
सब
मैग्‍नीशियम से पहले प्रभावित जगह पर गरम पानी की बोतल का सेंक रखें। इससे वहां की ब्‍लड सप्‍पलाई बढ़ जाएगी। इससे मासपेशियां और नसें रिलैक्‍स होंगी। एक साफ कपड़े को गरम पानी में 5 मिनट के लिये भिगोएं और फिर उससे प्रभावित जगह को सेंके। आप चाहें तो गरम पानी से स्‍नान भी कर सकती हैं।



मैग्‍नीशियम का सेवन करें-
हरी पत्‍तेदार सब्‍जियां, मेवे, बीज, ओटमील, पीनट बटर, ठंडे पानी की मछलियां, सोया बीन, अवाकाडो, केला, डार्क चॉकलेट और लो फैट दही आदि खानी चाहिये। आप रोजाना मैग्‍नीशियम 350 एम जी की सप्‍पलीमेंट भी ले सकती हैं। -
प्रभावित हिस्‍से को ऊपर उठाएं-
हाथ और पैरों के खराब ब्‍लड सर्कुलेशन से ऐसा होता है। इसलिये उस प्रभावित हिस्‍से को ऊपर की ओर उठाइये जिससे वह नार्मल हो सके। इससे सुन्‍न वाला हिस्‍सा ठीक हो जाएगा। आप अपने प्रभावित हिस्‍से को तकिये पर ऊंचा कर के भी लेट सकते हैं।
मसाज-
जब भी हाथ पैर सन्‍न हो जाएं तब उन्‍हें मसाज देना शुरु कर दें। इससे ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ता है। गरम जैतून तेल, नारियल तेल या सरसों के तेल से मसाज करें।
अगर हाथ पैरों में जन्‍नाहट होती है तो अपने आहार में ढेर सारे विटामिन बी, बी6 और बी12 को शामिल करें। इनके कमी से हाथ, पैरों, बाजुओं और उंगलियों में सुन्‍नता पैदा हो जाती है। आपको अपने आहार में अंडे, अवाकाडो, मीट, केला, बींस, मछली, ओटमील, दूध, चीज़, दही, मेवे, बीज और फल शामिल करने चाहिये। आप चाहें तो vitamin B-complex supplement भी दिन में दो बार खा सकते हैं