22.8.16

केले की चाय के फायदे


आपने लेमन टी, ब्लैक टी या ग्रीन टी तो बहुत पी होगी। लेकिन क्या आपने कभी केले की चाय पी है? नहीं! तो पीजिए जनाब क्योंकि यही तो जापान के लोगों की लंबी उम्र का राज है। इसके साथ ही ये कई बीमारियों को दूर भी करती है।दूध की चाय, तुलसी की चाय, काली चाय और नींबू की चाय तो आप सभी ने जरूर पी होगी। लेकिन क्या आप जानते हैं केले की भी चाय बनती है। जो आपकी सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है। केले की चाय पीने से कई सारी समस्याएं दूर होती हैं। यह एक अचूक घरेलू उपाय है रोगों से बचने का।
केले की चाय को किस तरह से बनाया जाता है-
सामग्री
एक मध्यम या छोटे आकार का केला
एक कप पानी
दालचीनी चूर्ण

केले की चाय बनाने की विधि-
सबसे पहले आप एक कप पानी को गैस या चूले में उबालें इसके बाद स्वाद के हिसाब से इसमें दालचीनी पाउडर को डाल दें। और फिर केला का छिलका उतार कर उबलते हुए पानी में डाल दें। दस मिनट के बाद इसे छानकर इसे किसी कप डालकर पीजिए। बहुत ही कम समय में बन जाती है यह चाय ।
अब जानते हैं केले की चाय से मिलने वाले फायदों के बारे में-
कब्ज की समस्या में-
आप दूध की चाय की बजाए केले की चाय का सेवन करेगें तो इससे आपकी पुरानी से पुरानी कब्ज की बीमारी ठीक हो जाएगी।
तनाव या टेंशन में-
केले की चाय सीधे दिमाग पर असर करती हैं जिससे इंसान का नर्वस सिस्टम को आराम मिलता है और आपका बढ़ा हुआ तनाव व टेंशन दूर होने लगती है।

पेट दर्द में-
केले की चाय में मैग्नीशियम और पोटैशियम होता है जो पेट के दर्द को आसानी से ठीक कर देती है।
अनिंद्रा की समस्या-
केले की चाय आपके लिए फायदेमंद होती है। इसे पीने से नींद न आने की समस्या दूर होती है। और आपको बहुत की आरामदायक नींद आती है।अगर आपको भी अच्छी नींद नहीं आती है और सोने के दौरान आप बीच-बीच में उठ बैठते हैं तो केले वाली चाय पीना आपके लिए बहुत फायदेमंद है.आमतौर पर लोग अच्छी नींद के लिए नींद की गोली ले लेते हैं लेकिन आप चाहें तो नींद की गोली की जगह केले वाली चाय ले सकते हैं. वैसे भी नींद की गोली लेने से अक्सर भारीपन, कब्ज और पेट दर्द की शिकायत हो जाती है.केले में पोटैशियम की भरपूर मात्रा पायी जाती है. इसके साथ ही ये मैग्नीशियम का भी खजाना है. ये दोनों ही तत्व नर्वस सिस्टम को रीलैक्स करने का काम करते हैं और तनाव को कम करते हैं.\अगर आपको नींद न आने की समस्या है तो केले का चाय पीएं। इससे आपको गहरी और सुहानी नींद आएगी।
केले वाली चाय बनाने में मुश्क‍िल से 10 मिनट का समय लगता है. एक छोटा केला ले लें और एक कप पानी में दालचीनी डालकर उसे उबाल लें. जब पानी उबलने लगे तो इसमें केला डाल दें. इसे 10 मिनट तक उबलने दें. इसे छानकर पी लें.




21.8.16

खजूर,छुहारा ,खारक खाने के फायदे





छुहारा और खजूर एक ही पेड़ की देन है। इन दोनों की तासीर गर्म होती है और ये दोनों शरीर को स्वस्थ रखने, मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।छुहारे को खारक भी कहते हैं। यह पिण्ड खजूर का सूखा हुआ रूप होता है, जैसे अंगूर का सूखा हुआ रूप किशमिश और मुनक्का होता है। छुहारे का प्रयोग मेवा के रूप में किया जाता है। इसके मुख्य भेद दो हैं- 1. खजूर और 2. पिण्ड खजूर। इसके फल लाल, भूरे या काले बेलन आकार के होते हैं, जो 6 महीनों में पकते हैं। इसके फल में एक बीज होता है और छिलका गूदेदार होता है।एक पेड़ 50 किलो फल हर मौसम में देता है। इसकी औसत उम्र 50 वर्ष आँकी गई है। इसकी खेती मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के सूखे क्षेत्रों में की जाती है। इराक, ईरान और सऊदी अरब में इसका उत्पादन सर्वाधिक होता है। ठंड के दिनों में खाया जाने वाला यह फल बहुत पौष्टिक होता है। इसमें 75 से 80 प्रतिशत ग्लूकोज होता है।
खजूर को सर्दियों का मेवा कहा जाता है और इसे इस मौसम में खाने से खास फायदे होते हैं। खजूर या पिंडखजूर कई प्रकार के पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें आयरन और फ्लोरिन भरपूर मात्रा में होते हैं इसके अलावा यह कई प्रकार के विटामिंस और मिनरल्स का बहुत ही खास स्त्रोत होता है।
गर्म तासीर होने के कारण सर्दियों में तो इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है। खजूर में छुहारे से ज्यादा पौष्टिकता होती है। खजूर मिलता भी सर्दी में ही है।
गुण : यह शीतल, रस तथा पाक में मधुर, स्निग्ध, रुचिकारक, हृदय को प्रिय, भारी तृप्तिदायक, ग्राही, वीर्यवर्द्धक, बलदायक और क्षत, क्षय, रक्तपित्त, कोठे की वायु, उलटी, कफ, बुखार, अतिसार, भूख, प्यास, खाँसी, श्वास, दम, मूर्च्छा, वात और पित्त और मद्य सेवन से हुए रोगों को नष्ट करने वाला होता है। यह शीतवीर्य होता है, पर सूखने के बाद छुहारा गर्म प्रकृति का हो जाता है।

परिचय : यह 30 से 50 फुट ऊँचे वृक्ष का फल होता है। खजूर, पिण्ड खजूर और गोस्तन खजूर (छुहारा) ये तीन भेद भाव प्रकाश में बताए गए हैं। खजूर के पेड़ भारत में सर्वत्र पाए जाते हैं। सिन्ध और पंजाब में इसकी खेती विशेष रूप से की जाती है। पिण्ड खजूर उत्तरी अफ्रीका, मिस्र, सीरिया और अरब देशों में पैदा होता है। इसके वृक्ष से रस निकालकर नीरा बनाई जाती है।
उपयोग
खजूर के पेड़ से रस निकालकर 'नीरा' बनाई जाती है, जो तुरन्त पी ली जाए तो बहुत पौष्टिक और बलवर्द्धक होती है और कुछ समय तक रखी जाए तो शराब बन जाती है। इसके रस से गुड़ भी बनाया जाता है। इसका उपयोग वात और पित्त का शमन करने के लिए किया जाता है। यह पौष्टिक और मूत्रल है, हृदय और स्नायविक संस्थान को बल देने वाला तथा शुक्र दौर्बल्य दूर करने वाला होने से इन व्याधियों को नष्ट करने के लिए उपयोगी है। कुछ घरेलू इलाज में उपयोगी प्रयोग इस प्रकार हैं-
दुर्बलता : 4 छुहारे एक गिलास दूध में उबालकर ठण्डा कर लें। प्रातःकाल या रात को सोते समय, गुठली अलग कर दें और छुहारें को खूब चबा-चबाकर खाएँ और दूध पी जाएँ। लगातार 3-4 माह सेवन करने से शरीर का दुबलापन दूर होता है, चेहरा भर जाता है, सुन्दरता बढ़ती है, बाल लम्बे व घने होते हैं और बलवीर्य की वृद्धि होती है। यह प्रयोग नवयुवा, प्रौढ़ और वृद्ध आयु के स्त्री-पुरुष, सबके लिए उपयोगी और लाभकारी है।
इसका इस्तेमाल नियमित तौर पर करने से आप खुद को कई प्रकार के रोगों से दूर रख सकते हैं और यह कॉलेस्ट्राल कम रखने में भी मददगार है। खजूर को इस्तेमाल करने के अनगिनत फायदे हैं क्योंकि खजूर में कॉलेस्ट्रोल नही होता है और फेट का स्तर भी काफी कम होता है। खजूर में प्रोटीन के साथ साथ डाइटरी फाइबर और विटामिन B1,B2,B3,B5,A1 और c भरपूर मात्रा में होते हैं।
घाव और गुहेरी : छुहारे की गुठली को पानी के साथ पत्थर पर घिसकर, इसका लेप घाव पर लगाने से घाव ठीक होता है। आँख की पलक पर गुहेरी हो तो उस पर यह लेप लगाने से ठीक होती है।
रात में बिस्तर गीला करने वाले बच्चों के लिए खजूर अत्यधिक लाभकारी है। यह उन लोगों के लिए भी बहुत कारगर है जिन्हें बार-बार बाथरुम जाना पडता है
शीघ्रपतन : प्रातः खाली पेट दो छुहारे टोपी सहित खूब चबा-चबाकर दो सप्ताह तक खाएँ। तीसरे सप्ताह से 3 छुहारे लेने लगें और चौथे सप्ताह से 4। चार छुहारे से ज्यादा न लें। इस प्रयोग के साथ ही रात को सोते समय दो सप्ताह तक दो छुहारे, तीसरे सप्ताह में तीन छुहारे और चौथे सप्ताह से बारहवें सप्ताह तक यानी तीन माह पूरे होने तक चार छुहारे एक गिलास दूध में उबालकर, गुठली हटाकर, खूब चबा-चबाकर खाएँ और ऊपर से दूध पी लें। यह प्रयोग स्त्री-पुरुषों को अपूर्व शक्ति देने वाला, शरीर को पुष्ट और सुडौल बनाने वाला तथा पुरुषों में शीघ्रपतन रोग को नष्ट करने वाला है।
खजूर में शरीर को एनर्जी प्रदान करने की अद्भुत क्षमता होती है क्योंकि इसमें प्राक्रतिक शुगर जैसे की ग्लूकोज़, सुक्रोज़ और फ्रुक्टोज़ पाए जाते हैं। खजूर का भरपूर फायदा इसे दूध में मिलाकर इस्तेमाल करने से मिलता है।
दमा : दमा के रोगी को प्रतिदिन सुबह-शाम 2-2 छुहारे खूब चबाकर खाना चाहिए। इससे फेफड़ों को शक्ति मिलती है और कफ व सर्दी का प्रकोप कम होता है।
खजूर उन लोगों के लिए अत्यधिक लाभकारी है जो वजन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इसका उपयोग शराब पीने से शरीर को होने वाले नुकसान से बचने में भी किया जाता है।अगर पाचन शक्ति अच्छी हो तो खजूर खाना ज्यादा फायदेमंद है।
अगर आप अपने शरीर का शुगर स्तर को खजूर के उपयोग से निय़ंत्रित कर सकते हैं। खजूर को शहद के साथ इस्तेमाल करने से डायरिया में भरपूर लाभ होता है।
छुहारे का सेवन तो सालभर किया जा सकता है, क्योंकि यह सूखा फल बाजार में सालभर मिलता है।
खजूर से पेट का कैंसर भी ठीक होता है। इसके विषय में सबसे अच्छी बात यह है कि इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। इससे आंखों की रोशनी भी बढ़ती है और इसके नियमित उपयोग से रतोंधी से भी छुटकारा मिलता है।
छुहारा यानी सूखा हुआ खजूर आमाशय को बल प्रदान करता है।
खजूर में पाए जाने वाली पोटेशियम की भरपूर और सोडियम की कम मात्रा के कारण से शरीर के नर्वस सिस्टम के लिए बेहद लाभकारी है। शोध से साबित हुआ है कि शरीर को पोटेशियम की काफी जरुरत होती है और इससे स्ट्रोक का खतरा कम होता है। खजूर शरीर में होने वाले LDL कॉलेस्ट्रोल के स्तर को भी कम रखकर आपके दिल के स्वास्थ्य की रक्षा करता है।
छुहारे की तासीर गर्म होने से ठंड के दिनों में इसका सेवन नाड़ी के दर्द में भी आराम देता है।
खजूर के उपयोग से निराशा को दूर किया जा सकता है और यह स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए अत्यधिक लाभकारी है। खजूर गर्भवती महिलाओं में होने वाली कई प्रकार की समस्याओं से छुटकारा दिलाता है क्योंकि यह बच्चेदानी की दीवार को मज़बूती प्रदान करता है। इससे बच्चों के पैदा होने की प्रक्रिया आसान हो जाती है और खून का स्त्राव भी कम होता है।
छुहारा खुश्क फलों में गिना जाता है, जिसके प्रयोग से शरीर हृष्ट-पुष्ट बनता है। शरीर को शक्ति देने के लिए मेवों के साथ छुहारे का प्रयोग खासतौर पर किया जाता है।
. सेक्सुअल स्टेमिना बढाने में खजूर की अहम भूमिका होती है। खजूर को रातभर बकरी के दूध में गलाकर सुबह पीस लेना चाहिए और फिर इसमें थोड़ा शहद और इलाइची मिलाकर सेवन करने से सेक्स संबंधी समस्याओं में बहुत लाभ होता है।
छुहारे व खजूर दिल को शक्ति प्रदान करते हैं। यह शरीर में रक्त वृद्धि करते हैं।
खजूर में पाया जाने वाला आयरन शरीर में खून की कमी यानी की एनीमिया को ठीक करने में बहुत कारगर है। खजूर की मात्रा बढाकर खून की कमी को दूर किया जा सकता है। ख़जूर में फ्लूरिन भी पाया जाता है जिससे दांतों के क्षय होने की प्रकिया धीमी हो जाती है।
साइटिका रोग से पीड़ित लोगों को इससे विशेष लाभ होता है।
खजूर के सेवन से दमे के रोगियों के फेफड़ों से बलगम आसानी से निकल जाता है।
लकवा और सीने के दर्द की शिकायत को दूर करने में भी खजूर सहायता करता है।
भूख बढ़ाने के लिए छुहारे का गूदा निकाल कर दूध में पकाएं। उसे थोड़ी देर पकने के बाद ठंडा करके पीस लें। यह दूध बहुत पौष्टिक होता है। इससे भूख बढ़ती है और खाना भी पच जाता है।
प्रदर रोग स्त्रियों की बड़ी बीमारी है। छुआरे की गुठलियों को कूट कर घी में तल कर, गोपी चन्दन के साथ खाने से प्रदर रोग दूर हो जाता है।
छुहारे को पानी में भिगो दें। गल जाने पर इन्हें हाथ से मसल दें। इस पानी का कुछ दिन प्रयोग करें, शारीरिक जलन दूर होगी।
अगर आप पतले हैं और थोड़ा मोटा होना चाहते हैं तो छुहारा आपके लिए वरदान साबित हो सकता है, लेकिन अगर मोटे हैं तो इसका सेवन सावधानीपूर्वक करें।
जुकाम से परेशान रहते हैं तो एक गिलास दूध में पांच दाने खजूर डालें। पांच दाने काली मिर्च, एक दाना इलायची और उसे अच्छी तरह उबाल कर उसमें एक चम्मच घी डाल कर रात में पी लें। सर्दी-जुकाम बिल्कुल ठीक हो जाएगा।
दमा की शिकायत है तो दो-दो छुहारे सुबह-शाम चबा-चबा कर खाएं। इससे कफ व सर्दी से मुक्ति मिलती है।
घाव है तो छुहारे की गुठली को पानी के साथ पत्थर पर घिस कर उसका लेप घाव पर लगाएं, घाव तुरंत भर जाएगा।
अगर शीघ्रपतन की समस्या से परेशान हैं तो तीन महीने तक छुहारे का सेवन आपको समस्या से मुक्ति दिला देगा। इसके लिए प्रात: खाली पेट दो छुहारे टोपी समेत दो सप्ताह तक खूब चबा-चबाकर खाएं। तीसरे सप्ताह में तीन छुहारे खाएं और चौथे सप्ताह से 12वें सप्ताह तक चार-चार छुहारों का रोज सेवन करें। इस समस्या से मुक्ति मिल जाएगी।

16.7.16

जटामांसी के गुण लाभ उपचार


जटामांसी कश्मीर, भूटान, सिक्किम और कुमाऊं जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में अपने आप उगती है। इसे ‘बालछड़’ के नाम से भी जाना जाता है।
जटामांसी ठण्डी जलवायु में उत्पन्न होती है। इसलिए यह हर जगह आसानी से नहीं मिलती। इसे जटामांसी इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसकी जड़ में बाल जैसे तन्तु लगे होते हैं।
सावधानी : जटामांसी का ज्यादा उपयोग करने से गुर्दों को हानि पहुंच सकती है और पेट में कभी भी दर्द शुरू हो सकता है।
मात्रा : 2 से 4 ग्राम जड़ का चूर्ण और काढ़ा 10 मिलीलीटर।
*इसके सेवन से बाल काले और लम्बे होते है। इसके काढ़े को रोजाना पीने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
*मस्तिष्क और नाड़ियों के रोगों के लिए ये राम बाण औषधि है, ये धीमे लेकिन प्रभावशाली ढंग से काम करती है. पागलपन , हिस्टीरिया, मिर्गी, नाडी का धीमी गति से चलना,,मन बेचैन होना, याददाश्त कम होना इन सारे रोगों की यही अचूक दवा है.
*ये त्रिदोष को भी शांत करती है और सन्निपात के लक्षण ख़त्म करती है. चर्म रोग , सोरायसिस में भी इसका लेप फायदा पहुंचाता है.
 


*जटामांसी की जड़ को गुलाबजल में पीसकर चेहरे पर लेप की तरह लगायें। इससे कुछ दिनों में ही चेहरा खिल उठेगा।
*जटामांसी चबाने से मुंह की दुर्गन्ध नष्ट होती है। दांतों में दर्द हो तो जटामांसी के महीन पावडर से मंजन कीजिए.
*मेंनोपॉज के समय ये सच्ची साथी की तरह काम करती है. इसका शरबत दिल को मजबूत बनाता है, और शरीर में कहीं भी जमे हुए कफ को बाहर निकालता है.
*मासिक धर्म के समय होने वाले कष्ट को जटामांसी का काढा ख़त्म करता है. हाथ-पैर कांपने पर या किसी दूसरे अंग के अपने आप हिलने पर जटामांसी का काढ़ा 2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम रोज सेवन करें।
*जटामांसी का काढ़ा बनाकर 280 से 560 मिलीग्राम सुबह-शाम लेने से टेटनेस का रोग ठीक हो जाता है। *जटामांसी और हल्दी बराबर की मात्रा में पीसकर मस्सों पर लगायें। इससे बवासीर नष्ट हो जाती है।
*इसे पानी में पीस कर जहां लेप कर देंगे वहाँ का दर्द ख़त्म हो जाएगा ,विशेषतः सर का और हृदय का. 

*इसको खाने या पीने से मूत्रनली के रोग, पाचननली के रोग, श्वासनली के रोग, गले के रोग, आँख के रोग,दिमाग के रोग, हैजा, शरीर में मौजूद विष नष्ट होते हैं.
*अगर पेट फूला हो तो जटामांसी को सिरके में पीस कर नमक मिलाकर लेप करो तो पेट की सूजन कम होकर पेट सपाट हो जाता है.
*जटामांसी के बारीक चूर्ण से मालिश करने से ज्यादा पसीना आना कम हो जाता है। जटामांसी और तिल को पानी में पीसकर इसमें नमक मिलाकर सिर पर लेप करने से आधासीसी का दर्द दूर हो जाता है।  



15.7.16

अजमोद के फायदे


अजमोद के गुण प्राय अजवाइन की तरह होते हैं। परन्तु अजमोद का दाना अजवाइन से बड़ा होता है। अजमोद विटामिन ए, बी और सी, पोटैशियम, मैंगनीज, मैग्‍नीशियम, फॉस्फोरस, कैल्शियम, आयरन, सोडियम और फाइबर से भरपूर होता है। इसमें एपिजेनिन और लूटेओलिन जैसे तत्‍व भी पाये जाते हैं। गर्म तासीर का अजमोद श्वास, सूखी खांसी और आंतरिक शीत के लिए लाभकारी होता है।
कमजोरी दूर करे
अगर आप कमजोरी महसूस करते हैं तो आपके लिए अजमोद का सेवन फायदेमंद हो सकता हैं। कमजोरी को दूर करने के लिए कॉफी में अजमोद की जड़ के बारीक चूर्ण को डालकर सेवन करने से लाभ मिलता है। लेकिन इसका सेवन करते समय इस बात का ध्यान रखें कि इसका प्रयोग मिर्गी के रोगी और गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक होता है।
श्वास रोगों में लाभकारी
मांसपेश‍ियों की शिथिलता के कारण उत्पन्न श्वसन नली की सूजन और श्वास रोगों में अजमोद लाभकारी होता हैं। श्वास रोगों को दूर करने के लिए इसकी 3-6 ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार प्रयोग करें।

अगर आपको भोजन के बाद हिचकियां आती है तो अजमोद के 10-15 दाने मुंह में रखने से हिचकी बंद हो जाती है। या आप अजमोद को मुंह में रखकर उसका रस चूस लें इससे भी हिचकी से आराम मिलता है।
उल्टी में लाभकारी
उल्टियां होने पर अजमोद का सेवन काफी लाभकारी होता है। अजमोद के चूर्ण का सेवन उल्टी रोकने में काफी मदद करता है। अजमोद में लौंग और शहद मिलाकर चाटने से भी उल्टी आना बंद हो जाता है।
किडनी रोग में लाभकारी
अजमोद किडनी की सफाई के लिए जाना जाता है। किडनी में मौजूद व्यर्थ पदार्थों को बाहर निकाल कर यह आपको स्वस्थ रखता है। अजमोद पेट की समस्याओं को दूर रखने में मदद करता है। यह देर तक भूख का एहसास नहीं होने देता है जिससे यह वजन को काबू में रखने में मदद करता है।
दर्द और सूजन दूर करें
अजमोद से बदन दर्द कुछ ही देर में छूमंतर हो जाता है। दर्द होने पर अजमोद को सरसों के तेल में उबालकर मालिश करनी चाहिए। या फिर अजमोद की जड़ का 3-5 ग्राम चूर्ण दिन में दो-तीन बार सेवन करना किसी भी तरह के दर्द और सूजन में लाभकारी होता है।
ब्रेस्‍ट कैंसर में उपयोगी
अजमोद में एपिजेनिन नामक तत्‍व पाया जाता है। यह तत्‍व ब्रेस्‍ट कैंसर के खतरे का कम करता है। अजमोद के सेवन से ब्रेस्‍ट कैंसर के ट्यूमर की संख्या को कम करने और उनके विकास को धीमा करने में मदद मिलती है।

8.7.16

गोखरू के औषधीय गुण और प्रयोग Benefits of Bunion



गोखरू के बीज ठंडक देने वाले, मूत्रवर्धक, मुत्रशोधक, टॉनिक, शक्तिवर्धक, वीर्यवर्धक और कामोद्दीपक aphrodisiac होते है और इसका प्रयोग विविध रोगों के उपचार में किया जाता है जैसे की सांस की बिमारी, वात रोग, पथरी, नाड़ी दुर्बलता, वात नाड़ी विकार, बवासीर, दुर्बलता आदि।
गोखरू को बहुत से नामों से जाना जाता है। इसे गोक्षुर, त्रिकंटक, क्षुरक, स्वादुकंटक, गोखरू काटा आदि भी कहते हैं। इसके फलों पर कांटे के समान रचना होती है जिस कारण से इसे त्रिकंटक कहते है। इसकी जड़, दशमूल dashmool समूह की एक घटक है। औषधीय प्रयोग के लिए इसके सूखे बीजों और जड़ का प्रयोग होता है


गोखरू किडनी फेल की प्रमुख औषधि है | खराब किडनी को ठीक करने के लिए मशहूर दवा है|गोखरू की पहचान शुरआत मे यूरोप कन्ट्री से हुई पहले इसका नाम सपोर्टिव किड्नी मेयीडियन था बाद मे यह दवा अमेरिका ऑस्ट्रेलिया अफ्रीका साउथ एशिया मे इसका प्रयोग चालू हुआ इसके सैकड़ों नाम है एरिया वाइज़ नाम इसका अलग अलग है यह किड्नी के लिए राम बाण की औषधि है गोखरू बंद किड्नी को चालू करता है किड्नी मे स्टोन को टुकड़े टुकड़े करके पेशाब के रास्ते बाहर निकल देता है क्रिएटिन यूरिया को बहुत ही झटके से जल्दी नीचे लाता है पेशाब मे जलन हो पेशाब ना होती है इसके लिए भी यह काम करता है इसके बारे मे आयुर्वेद के जनक आचार्य श्रुशूत ने भी लिखा इसके अलावा कई विद्वानो ने इसके बारे मे लिखा है इसका प्रयोग हर्बल दवाओं मे भी होता है आयुर्वेद की दवाओं मे भी होता है यह स्त्रियो के बंधत्व मे तथा पुरुषों के नपुंसकता मे भी बहुत उपयोगी होता है इसके बारे मे सारी जानकरी गूगल पर भी उपलब्ध है गूगल पर सर्च करने के लिए मेडिकल यूज ऑफ गोखरू लिख दीजिए! इस दवा का सेवन हमारे जानकरी मे कई लोगो ने किया है जिनका क्रिएटिन 12.5 तक था उन्हे भी 15 दिनो मे 4, 5 तक आ गया इस लिए जिन लोगो को किडनी की प्राब्लम है वो इसका सेवन करे बहुत ही फायदा होता है
गोखरू के आयुर्वेदिक गुण Ayurvedic Properties
रस (स्वाद): मधुर
गुण (विशेषताएँ): गुरु/भारी, स्निग्ध/चिकना
वीर्य (शक्ति): शीत/ठंडा
विपाक (पाचन के बाद प्रभाव): मधुर
आयुर्वेद में गोक्षुरु को अर्श, श्वास, कमजोरी, हृदय रोग, कास, मूत्र कृच्छ, पथरी, और प्रमेह के इलाज में प्रयोग किया जाता है।

गोखरू के फायदे -

आचार्य चरक ने गोक्षुर को मूत्र विरेचन द्रव्यों में प्रधान मानते हुए लिखा है-गोक्षुर को मूत्रकृच्छानिलहराणाम् अर्थात् यह मूत्र कृच्छ (डिसयूरिया) विसर्जन के समय होने वाले कष्ट में उपयोगी एक महत्त्वपूर्ण औषधि है । आचार्य सुश्रुत ने लघुपंचकमूल, कण्टक पंचमूल गणों में गोखरू का उल्लेख किया है । अश्मरी भेदन (पथरी को तोड़ना, मूत्र मार्ग से ही बाहर निकाल देना) हेतु भी इसे उपयोगी माना है ।
श्री भाव मिश्र गोक्षुर को मूत्राशय का शोधन करने वाला, अश्मरी भेदक बताते हैं व लिखते हैं कि पेट के समस्त रोगों की गोखरू सर्वश्रेष्ठ दवा है । वनौषधि चन्द्रोदय के विद्वान् लेखक के अनुसार गोक्षरू मूत्र पिण्ड को उत्तेजना देता है, वेदना नाशक और बलदायक है ।
'गोखरू के औषधीय उपयोग-
पथरी रोग :- पथरी रोग में गोक्षुर के फलों का चूर्ण शहद के साथ 3 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम दिया जाता है । महर्षि सुश्रुत के अनुसार सात दिन तक गौदुग्ध के साथ गोक्षुर पंचांग का सेवन कराने में पथरी टूट-टूट कर शरीर से बाहर चली जाती है । मूत्र के साथ यदि रक्त स्राव भी हो तो गोक्षुर चूर्ण को दूध में उबाल कर मिश्री के साथ पिलाते हैं ।
सुजाक रोग :- सुजाक रोग (गनोरिया) में गोक्षुर को घंटे पानी में भिगोकर और उसे अच्छी तरह छानकर दिन में चार बार 5-5 ग्राम की मात्रा में देते हैं । किसी भी कारण से यदि पेशाब की जलन हो तो गोखरु के फल और पत्तों का रस 20 से 50 मिलीलीटर दिन में दो-तीन बार पिलाने से वह तुरंत मिटती है । प्रमेह शुक्रमेह में गोखरू चूर्ण को 5 से 6 ग्राम मिश्री के साथ दो बार देते हैं । तुरंत लाभ मिलता है ।
प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने में :- मूत्र रोग संबंधी सभी शिकायतों यथा प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने से पेशाब का रुक-रुक कर आना, पेशाब का अपने आप निकलना (युरीनरी इनकाण्टीनेन्स), नपुंसकता, मूत्राशय की पुरानी सूजन आदि में गोखरू 10 ग्राम, जल 150 ग्राम, दूध 250 ग्राम को पकाकर आधा रह जाने पर छानकर नित्य पिलाने से मूत्र मार्ग की सारी विकृतियाँ दूर होती हैं । प्रदर में, अतिरिक्त स्राव में, स्री जनन अंगों के सामान्य संक्रमणों में गोखरू एक प्रति संक्रामक का काम करता है । स्री रोगों के लिए 15 ग्राम चूर्ण नित्य घी व मिश्री के साथ देते हैं ।
बी.एच.यू. तथा जामनगर में हुए प्रयोगों के आधार पर कहा जा सकता है कि गोक्षुर चूर्ण प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र मार्ग में आए अवरोध को मिटाता है, उस स्थान विशेष में रक्त संचय को रोकती तथा यूरेथ्रा के द्वारों को उत्तेजित कर मूत्र को निकाल बाहर करता है । बहुसंख्य व्यक्तियों में गोक्षुर के प्रयोग के बाद ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं रह जाती । इसे योग के रूप न देकर अकेले अनुपान भेद के माध्यम से ही दिया जाए, यही उचित है, ऐसा वैज्ञानिकों का व सारे अध्ययनों का अभिमत है ।
नपुंसकता impotence arising from bad practice में, बराबर मात्रा में गोखरू के बीज का चूर्ण और तिल के बीज sesame seeds powder के चूर्ण, को बकरी के दूध और शहद के साथ दिया जाता है।
धातु की कमजोरी में इसके ताजे फल का रस 7-14 मिलीलीटर या 14-28 मिलीलीटर सूखे फल के काढ़े, को दिन में दो बार दूध के साथ लें।
धातुस्राव, स्वप्नदोष nocturnal fall, प्रमेह, कमजोरी weakness, और यौन विकारों sexual disorders में 5 ग्राम गोखरू चूर्ण को बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करें।
यौन शक्ति को बढ़ाने के लिए, गोखरू, शतावर, नागबला, खिरैटी, असगंध, को बराबर मात्रा में कूट कर, कपड़चन कर लें और रोज़ १ छोटा चम्मच दूध के साथ ले। इसको ४० दिन तक लगातार लें।
अश्मरी urinary stones में 5 ग्राम गोखरू चूर्ण (फल का पाउडर) शहद के साथ दिन में दो बार, पीछे से गाय का दूध लें।
मूत्रकृच्छ painful urination में 5g गोखरू चूर्ण को दूध में उब्बल कर पीने से आराम मिलता है। यह मूत्र की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है और सूजन कम करता है।
मूत्रघात urinary retention में 3-6 ग्राम फल का पाउडर, पानी के साथ दिन में दो बार लें।
रक्तपित्त में गोखरू के फल को 100-200 मिलीलीटर दूध में उबाल कर दिन में दो बार लें।
अन्य उपयोग-
ऊपर वर्णित प्रयोगों के अतिरिक्त यह नाड़ी दुर्बलता, वात नाड़ी विकार, बवासीर, दुर्बलता, खाँसी तथा श्वांस रोगों में भी प्रयुक्त होता है । यह वल्य रसायन भी है तथा कमजोर पुरुषों व महिलाओं के लिए एक टॉनिक भी है । यह दशमूलारिष्ट में प्रयुक्त होने वाला एक द्रव्य भी है । यह नपुंसकता तथा निवारण तथा बार-बार होने वाले गर्भपात में भी सफलता से प्रयुक्त होता है ।पथरी की चिकित्सा में सबसे महत्वपूर्ण औषधी है गोखरू :- पथरी के रोगी को इसके बीजो का चूर्ण दिया जाता है तथा पत्तों का पानी बना के पिलाया जाता है | इसके पत्तों को पानी में कुछ देर के लिए भिगो देते है | उसके बाद पतो को १५ बीस बार उसी पानी में डुबोते है और निकालते है इस प्रक्रिया में पानी चिकना गाढा लार युक्त हो जाता है | यह पानी रोगी को पिलाया जाता है स्वाद हेतु इसमे चीनी या नमक थोड़ी मात्रा में मिलाया जा सकता है | यह पानी स्त्रीयों में स्वेत प्रदर ,रक्त प्रदर पेशाब में जलन आदि रोगों की राम बाण औषधी है | यह मूत्राशय में पडी हुयी पथरी को टुकड़ों में बाट कर पेशाब के रास्ते से बाहर निकाल देता है | अगर किसी प्रकार की कोइ शंका हो तो किसी अच्छे वैध से परामर्श लेवे |

गोखरू  के प्रयोग -

28.6.16

जहरीले जन्तुओं के काटने के उपचार: Poisonous animal bites, home remedies



सांप काटने पर -
१) हींग को अरंड की कोपलों के साथ पीसकर चने के बराबर गोलियां बनाइए तथा सांप के काटने पर दो – दो गोली आधे – आधे घंटे पर गर्म पानी के साथ देने पर लाभ होता है।
२) सांप के काटने पर सौ से दो सौ ग्राम शुद्ध घी पिलाकर उल्‍टी कराने से सांप के विष का असर कम होता है। घी पिलाने के १५ मिनट बाद कुनकुना पानी अधिक से अधिक पिलाएं इससे तुरंत उल्टियां होने लगेंगीं और सांप का विष भी बाहर निकलता जाएगा।


३) सांप के काटने पर ५० ग्राम घी में १ ग्राम फिटकरी पीसकर लगाने से भी जहर दूर होता है।



Bichhoo ka Jahar Utarne Ka Mantra - बिच्छू के जहर के लिए मंत्र
॥ मंत्र ||



ॐ नमो समुन्द्र।
समुन्द्र में कमल।
कमल में विषहर।
बिच्छू कहूं तेरी जात।
गरुड़ कहे मेरी अठारह जात।
छह काला।
छह कांवरा।
छह कूँ कूँ बान।
उतर रे उतर नहीं तो गरुड़ पंख हँकारे आन।
सर्वत्र बिसन मिलाई।
उतर रे बिच्छू उतर।
मेरी भक्ति।
गुरु कि शक्ति।
फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।

विधि: पहले १०८ बार मंत्र का जप करें। फिर शुद्ध गंगा जल, समुन्द्र या किसी भी नदी का जल ले कर सात बार मंत्र जप करतेहुए झाड़ा लगा दें घाव पर हाथ रख कर।

कुत्‍ता काटने पर-
१) जंगली चौलाई की जड़ १२५ ग्राम लेकर पीस लें और पानी के साथ बार बार रोगी को पिलाएं। इससे कुत्‍ते के काटने से पागल हुए रोगी को बचाया जा सकता है।
२) प्‍याज का रस और शहद मिलाकर पागल कुत्‍ते के काटने से हुए घाव पर लगाने से जहर उतरता है।
३) लाल मिर्च पीसकर तुरंत घाव में भर दें। इससे कुत्‍ते का जहर जल जाता है और घाव भी जल्‍दी ठीक हो जाता है।
४) हींग को पानी में पीस कर लगाने से पागल कुत्‍ते के काटने से हुए घाव का जहर उतर जाता है।

ततैया काटने पर- 

* ततैया या बर्रे ने काटा हो तो उस स्‍थान पर खटटा अचार या खटाई मल दें। जलन खत्‍म हो जाएगी।

* काटे हुए स्‍थान पर फौरन मिटटी का तेल लगाएं। जलन शांत हो जाएगी।

 * ततैया के काटने पर उस स्‍थान पर नींबू का रस लगाएं। सूजन और दर्द चला जाएगा।

 * मधुमक्‍खी के डंक पर सोआ और सेंधा नमक को चटनी बनाकर लेप करने से दर्द दूर हो जाता है।
* मकड़ी के काटने पर अमचुर को पानी में मिलाकर घाव पर लगाएं। आराम मिलेगा।
* कनखजूरे के काटने पर प्‍याज और लहसुन पीसकर लगाने से उसका जहर उतर जाता है।

 * छिपकली के काटने पर सरसों का तेल राख के साथ मिलाकर घाव पर लगाने से जहर दूर होता है।
नोट- उम्दा इलाज आधुनिक चिकित्‍सा पद्धति में ही है। इसलिए जैसे ही संभव हो मरीज को तुरंत अस्‍पताल में भर्ती कराएं।

27.6.16

नींबू के रस से कई रोगों का ईलाज Lemon juice cures many diseases



नींबू पानी के फायदों को देखते हुए यह अब पश्चिमी देशों के साथ ही हमारे देश में भी काफी लोकप्रिय हो गया है | अब यह ऐसी डाईट थेरपी बन चुकी है जो बेहद सस्ती,सुरक्षित और अपनाने में आसान है| यह डाईट उन लोगों के लिए उपादेय है जो बढे वजन से परेशान हैं और नियमित कसरत नहीं कर सकते हैं|
सुबह और रात सोते वक्त पियें नीबू पानी-
\सुबह उठते ही एक गिलास मामूली गरम पानी में नींबू का रस मिलाकर पियें| इस उपचार के गुण और स्वाद बढाने के लिए दो चम्मच शहद भी मिलाया जा सकता है| इस डाईट प्लान को अपनाते हुए दिन भर भरपूर पानी पीना होता है| आप जितना ज्यादा पानी पीते हैं शरीर के विकार उतनी ही शीघ्रता से दूर होते जाते हैं|नींबू का रस शरीर में जमें कचरे को बाहर निकालता है| गलत खान पान और दिनचर्या के कारण यह कचरा शरीर में जमा होता रहता है|
*नींबू के रस और शहद के मिश्रण से मानव शरीर के अनेकों रोगों का समाधान हो जाता है। नींबू में प्रचुर साईट्रिक एसीड पाया जाता है। यह साईट्रिक एसीड शरीर की चयापचय क्रिया (मेटाबोलिज्म) को बढाकर भोजन को पचाने में मदद करता है। मेटाबोलिज्म को सुधारकर यह शरीर की अनावश्यक चर्बी घटाता है और इस प्रकार मोटापा कम करता है। नींबू रस में शहद मिलाकर लेना बेहद उपकारी उपचार है। शहद में एन्टीआक्सीडेंट तत्व होते हैं जो हमारे इम्युन पावर को ताकतवर बनाते है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है।
*पश्चिम के चिकित्सा वैज्ञानिकों का मत है कि थौडी मात्रा में नींबू का रस नियमित लेते रहने से मूत्र पथ में पथरी का निर्माण नहीं होता है। यह पथरी से बचाव का सरल तरीका है। दर असल नींबू का रस हमारे खून में केल्सियम की मात्रा बढने से रोकता है। खून में अनावश्यक केल्सियम बढने से ही केल्सियम आक्सीलेट प्रकार की पथरी बनती है। गुर्दे के खून में मिले हुए केल्सियम को बाहर निकालने में दिक्कत मेहसूस करते हैं।फ़िर यही केल्सियम गुर्दे में जमते रहने से पथरी बन जाती है। शहद में इन्फ़ेक्शन (संक्रमण) रोकने के गुण होते हैं। शहद में केंसर से लडने की प्रवृत्ति होती है। शहद सेवन से बडी आंत का केंसर नहीं होता है।
*चाय बनाने में नींबू रस और शहद का उपयोग करने से गले की खराश दूर होती है और सर्दी-जुकाम से रक्षा होती है।


     

आमाषय के विकार:- एक गिलास गरम पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने से आमाषय के कई विकार जैसे- जी मिचलाना,छाती में जलन होना,पेट में उपस्थित रोगाणु नष्ट होते हैं। पाचन प्रणाली पर अनुकूल प्रभाव पडता है। जिन लोगों में अधिक गैस बनने की प्रवृत्ति हो उनके लिये गरम पानी में नींबू का रस मिलाकर पीना रामबाण उपचार है। नींबू पानी के नियमित उपयोग से शरीर में एकत्र विजातीय याने जहरीले पदार्थ बाहर निकलेंगे। खून की सफ़ाई करता है।
 मेरे खयाल से नींबू कब्ज मिटाने का काम भी करता है। हिचकी की बीमारी में भी नींबू रस अच्छा प्रभाव दिखाता है। नींबू का रस लिवर के लिये भी हितकारी है। यह लिवर के टानिक के रूप में काम करता है। इसके प्रयोग से अधिक पित्त निर्माण होकर पाचन क्रिया सुधरती है। नींबू शरीर की श्लेष्मा को नियंत्रित करता है। प्रयोगों में सिद्ध हुआ है कि नींबू का रस पित्ताषय की पथरी को नष्ट करता है।
*नींबू मे कुदरती एंटीसेप्टिक तत्व होते हैं । अनेक प्रकार की चर्म विकृतियों से निजात पाने के लिये नींबू का प्रयोग हितकारी है। इसमें प्रचुर विटामिन सी होता है जिससे त्वचा कांतिमान बनती हैं। खूबसूरती बढती है। *नींबू शरीर के बूढा होने की प्रक्रिया को सुस्त करता है ,चमडी की झुर्रियां मिटाता है। त्वचा के काले धब्बे समाप्त ह्ते हैं। जले हुए स्थान पर नींबू पानी लगाने से जलन का निवारण होता है।
*नींबू का ताजा रस दर्द वाले दांत-दाढ पर भली प्रकार लगाने से पीडा शांत होती है। अगर मसूढों से खून बहता हो तो मसूढों पर नींबू रस की मालिश करने से खून बहना बंद होता है। मुंह की बद्बू का निवारण होता है। पायरिया में हितकारी है।
*कई चिकित्सा शौधों में यह सिद्ध हुआ है कि गरम पानी में नींबू रस मिलाकर पीने से मोटापा घटता है। इसमें थौडा शहद भी मिला सकते हैं।
*नींबू में प्रचुर पोटाशियम होता है। इसीलिये नींबू उच्च रक्तचाप में अति उपयोगी है। जी निचलाने और चक्कर आने में भी उपयोगी है। शरीर और दिमाग के लिये शांतिकारक है।
*नींबू का श्वसन तंत्र पर हितकारी प्रभाव होता है। दमा के मरीज लाभान्वित होते हैं\
*नींबू गठिया और संधिवात में लाभदायक है। दर असल नींबू मूत्रल प्रभाव रखता है। अधिक पेशाब के साथ शरीर का यूरिक एसीड बाहर निकलेगा । यूरिक एसीड गठिया और संधिवात का प्रमुख कारक माना गया है।
गरम पानी में नींबू पीने से सर्दी -जुकाम का निवारण होता है। पसीना होकर बुखार भी उतर जाता है।
*ब्लड शूगर पर नियंत्रण-नींबू पानी से हमारे शरीर का ब्लड शूगर ३० प्रतिशत तक कम किया जा सकता है| अपने आहार में शकर का उपयोग कम ही करें|



26.6.16

बिच्छू काटे के उपाय Scorpion Sting: home remedies

   गर्मियों के आते ही जहरीले कीड़े मकोड़े जमीन के अन्दर से निकल कर बाहर घूमने लगते हैं। उन्हें जहां भी अपने लिए सही वातावरण मिलता है वे वहीं पर अपना ठिकाना बना लेते है। कई जहरीले कीड़े ऐसे होते है जो अगर किसी को काट लें तो उनका जहर उतारना बड़ा ही मुश्किल होता है। उन्हीं में से एक है बिच्छु|
बिच्छू के काटने पर इलाज में जल्दी करनी चाहिए। इसके विष की यही पहिचान है कि काटे जाने के बाद शरीर में झनझनाहट होती है, स्थान भारी होता है। यदि भयंकर बिच्छू ने काटा तो शरीर में जलन होती है, पसीना छूटने लगता है, पीड़ा के मार अंग फटने लगता है। नाखूनों का रंग पीला, हरा, या नीला हो जाता है। नींद आने लगती है। मनुष्य प्रलाप करता है। नाक या मुँह से काले रंग का खून गिरने लगता है शरीर पर फफोले पड़ जाते हैं। प्यास खूब लगती है। पेशाब रुक जाता है|
 बिच्छु का जहर बहुत खतरनाक होता है।उसके काटने के बाद पूरे शरीर में जलन होने लगती है और उसका शिकार बुरी तरह से तड़पने लगता है। कुछ छोटे लेकिन बड़े काम के नुस्खे हैं जो आपको बिच्छु के जहर से बचा सकते हैं।
 * जानवरों के काटने व सांप, बिच्छू, जहरीले कीड़ों के काटे स्थान पर अपामार्ग के पत्तों और मूल का ताजा रस लगाने और पत्तों का रस 2 चम्मच की मात्रा में 2 बार पिलाने से विष का असर तुरंत घट जाता है और जलन तथा दर्द में आराम मिलता है।
 *. पत्थर पर दो-चार बूँद पानी की डालकर उस पर निर्मली या इमली के बीज को घिसें। उस घिसे हुए पदार्थ को दर्द वाले स्थान पर लगायें एवं जहाँ बिच्छू ने डंक मारा हो वहाँ घिसा हुआ बीज चिपका दें। दो मिनट में ही बिच्छू का विष नष्ट हो जायेगा और रोता हुआ मनुष्य भी हँसने लगेगा। 
* पोटेशियम परमैंगनेट एवं नींबू के फूल (साइट्रिक एसिड) को बारीक पीसकर अलग-अलग बॉटल में भरकर रखें। बिच्छू के डंक पर मूँग के दाने जितने नींबू के फूल का पाउडर एवं पोटेशियम परमैंगनेट का मूँग के दाने जितना पाउडर रखें। ऊपर से एक बूँद पानी भी डालें। थोड़ी देर में उभार आकर विष उतर जायेगा। यह अदभुत दवा है। 

*एक पत्थर को अच्छे से साफ कर उस उस पर फिटकरी को अच्छे से घिसें। जहां पर बिच्छु ने काटा है उस जगह पर इस लेप को लगाऐं और आग से थोड़ा सेकें । कैसे भी बिच्छु का जहर हो इस विधि से जहर दो मिनिट में उतर जाएगा। 
*बारीक पिसा सेंधा नमक और प्याज को मिलाकर बिच्छु के काटे हुए स्थान पर लगाने से जहर उतर जाता है। 
* माचिस की पांच सात तीलियों का मसाला पानीमें घिसकर बिच्छु के डंक लगी जगह पर लगाऐं। इसे लगाते ही बिच्छु का जहर तुरंत उतर जाता है। 
* जब किसी को बिच्छु काट ले तो तुरंत उस जगह को करीब चार उंगल ऊपर से किसी कपड़े से या रस्सी से बांध देना चाहिए। ताकि उसका जहर जल्दी न फैले। इसके बाद किसी साफ सेफ्टी पिन या चिमटी को गर्म करके त्वचा में घुसे ड़ंक को निकाल देन चाहिए।

बिच्छू का जहर बहुत खतरनाक होता है। उसके काटने के बाद पूरे शरीर में जलन होने लगती है और उसका शिकार बुरी तरह से तड़पने लगता है। कुछ छोटे लेकिन बड़े काम के नुस्खे हैं जो आपको बिच्छू के जहर से बचा सकते हैं।
*एक पत्थर को अच्छे से साफ कर उस उस पर फिटकरी को अच्छे से घिसें। जहां पर बिच्छू ने काटा है उस जगह पर इस लेप को लगाऐं और आग से थोड़ा सेकें । कैसे भी बिच्छू का जहर हो इस विधि से जहर दो मिनिट में उतर जाएगा।
* बारीक पिसा सेंधा नमक और प्याज को मिलाकर बिच्छू के काटे हुए स्थान पर लगाने से जहर उतर जाता है।
* माचिस की पांच सात तीलियों का मसाला पानी में घिसकर बिच्छू के डंक लगी जगह पर लगाऐं। इसे लगाते ही बिच्छू का जहर तुरंत उतर जाता है।

परिस्थिति के मुताबिक निर्णय लेते हुए आवश्कता पडऩे पर डॉक्टर से भी सलाह लें। जब किसी को बिच्छू काट ले तो तुरंत उस जगह को करीब चार उंगल ऊपर से किसी कपड़े से या रस्सी से बांध देना चाहिए। ताकि उसका जहर खून के साथ शरीर के बाकी हिस्सों में न फैले। इसके बाद किसी साफ सेफ्टी पिन या चिमटी को गर्म करके त्वचा में घुसे ड़ंक को निकाल देना चाहिए।
बिच्छू दंश  के कतिपय नुस्खे-
*गौ के घी में सेंधा नमक मिलाकर गरम कर लो और दंश स्थान पर लगाओ।
*जमाल गोटे को घिसकर काटे हुए स्थान पर लगाओ।
*कद्दू का डंठल पानी में घिसकर काटे हुए स्थान पर लगा दो।
*लाइकर अमोनिया” को काटी हुई जगह पर लगा दो।
*बिच्छू काटे की झनझनाहट को हाथों से दबा-दबाकर दंश की ओर ले जाओ। बाद में गीली राख काटी हुई जगह पर बाँध दो।
*मूली और नमक पीसकर दंश स्थान पर बाँध दो।
साँभरी नमक एक-एक आना भर मरीज को बार-बार खिलाओ।
*प्याज का रस काटे हुए स्थान पर निचोड़ो।
*नींबू के रस में बकरी की मेंगनी पीस कर लेप कर दो।
*सूरजमुखी का पत्ता मसल कर फौरन सुँघा दो।
*बेर की पत्तियाँ पीस कर दंश स्थान पर लुगदी बाँध दो।
*अपामार्ग की जड़ दंश-स्थान पर लगा दो
*प्याज और गुड़ खिलाओ।
*चूना और सेंधा नमक दंश-स्थान पर लगा दो।
*घी में सेंधा नमक मिलाकर लगा दो।
*सुपारी घिसकर लगाओ।

साईलिशिया के चमत्कार -
बिच्छू काटने पर बहुत दर्द होता है और जिसको बिच्छू काटता है उसके सिवा और कोई जान नही सकता कितना भयंकर कष्ट होता है। तो ऐसी परिस्थिति मे क्या करना चाहिए ? तो बिच्छू काटने पर एक होम्योपैथी की दवा है Silicea -200
 इसका लिक्विड  5 ml घर में रखे । बिच्छू काटने पर इस दवा को जीभ पर एक एक ड्रोप 10-10 मिनट अंतर पर तीन बार देना है । बिच्छू जब काटता है तो उसका जो डंक है न उसको अन्दर छोड़ देता है वो ही सबसे ज्यादा दर्द करता है । इस डंक को बाहर निकलना आसान काम नही है, 
डॉक्टर के पास जायेंगे वो चीरा लगायेगा फिर खिंच के निकालेगा उसमे उसमे ब्लीडिंग भी होगी तकलीफ भी होगी । ये मेडिसिन इतनी बेहतरीन मेडिसिन है के आप इसके तीन डोज देंगे 10-10 मिनट पर एक एक बूंद और आप देखेंगे वो डंक अपने आप निकल कर बाहर आ जायेगा। सिर्फ तीन डोज में आधे घन्टे में आप रोगी को ठीक कर सकते है। बहुत जबरदस्त मेडिसिन है ये Silicea 200.
------------------

18.6.16

पेट के रोगों के उपचार Treatment of diseases of the stomach

                         
                                                                                           
                                                                                                                    
                                                                                                                     
   
आधुनिक युग में बदहजमी का रोग पेट की कई बीमारियों के रूप में प्रकट हो रहा है। पेट  दर्द होना, मुहं में खट्टा चरका पानी उभरना, अपान वायु निकलना, उलटी होना, जी मिचलाना और पेट मे गैस इकट्ठी होकर निष्काशित नहीं होना इत्यादि  लक्षण्  प्रकट होते हैं।

        भोजन को भली प्रकार चबाकर नहीं खाना पेट रोगों का मुख्य कारण माना गया  है। अधिक आहार,अतिशय मद्यपान, तनाव और आधुनिक चिकित्सा की अधिक दवाईयां प्रयोग करना अन्य कारण हैं जिनसे पेट की व्याधियां जन्म लेती है।ज्यादा  और बार बार चाय और काफ़ी पीने की आदत से पेट में गेस बनने और कब्ज  का रोग पैदा होता है।  भूख न लगना ,जी घबराना, चक्कर आना, शिरोवेदना आदि समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। मुहं का स्वाद बिगड जाता है,जीभ पर मेल की तह जम जाती है, श्वास मे बदबू आती है, बेचेनी मेहसूस होना, अधिक  लार  पैदा होना,  पेट मे जलन होना, इन शिकायतो  से यह रोग पहिचाना जाता है।  भोजन के बाद पेट मे भारीपन मेहसूस होता है।
  इस रोग के इलाज मे खान पीन में बदलाव करना मुख्य बात है।

 कचोरी,समोसे,तेज मसालेदार व्यंजन का परित्याग पहली जरूरत  है। गलत खान पान जारी रखते हुए किसी भी औषधि से यह रोग स्थायी रूप से ठीक नहीं होगा।
अब मै कुछ ऐसे आसान उपचार आपको बता रहा हूं जिनके प्रयोग से पेट की व्याधियां  से मुक्ति मिल जाती है--
१) भोजन से आधा घन्टे पहिले एक  या दो  गिलास पानी पियें।  भोजन के एक घन्टे बाद दो गिलास पानी पीने की आदत बनावें। कुछ ही दिनों में फ़र्क नजर आयेगा।
२) आधा गिलास मामूली गरम जल में मीठा सोडा डालकर पीने से पेट की गेस में तुरंत  राहत  मिलती है।
3) Gastritis- पेट रोग मे रोगी को पहले २४ घन्टी मे सिर्फ़ नारियल का पानी पीने को देना चाहिये। नारियल के पानी में विटामिन्स और पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो आमाषय को आराम देते हैं और रोग मुक्ति में सहायक हैं।




४) चावल उबालें। इसका पानी रोगी को एक गिलास दिन मे दो  बार पिलाएं।  बहुत फ़ायदेमंद उपाय है।







५) आलू का रस भी गेस्ट्राइटिज रोग में लाभदायक साबित हुआ है। आधा गिलास आलू का रस भोजन से आधा घन्टे पहिले दिन में दो या तीन बार देना उपकारी है।










६) दो चम्मच मैथी दाना एक गिलास पानी में रात भर भिगोएं। सुबह छानकर इसका पानी पियें।  लाभ होगा।








७)  रोग की उग्रता में दो या तीन दिन निराहार रहना चाहिये। इस अवधि में सिर्फ़ गरम पानी पियें। ऐसा करने से  आमाषय  को विश्राम मिलेगा और विजातीय पदार्थ शरीर से निकलेंगे।जिससे आमाशय और आंतों की सूजन मिटेगी।


८)  दो  या तीन दिन के उपवास के बाद रोगी को अगले तीन दिन तक सिर्फ़ फ़ल खाना चाहिये। सेवफ़ल, तरबूज, नाशपती,अंगूर,पपीता अमरूद आदि फ़ल उपयोग करना उपादेय हैं।












९)  पेट की बीमारियों में मट्ठा,दही प्रचुरता से लेना लाभप्रद है।






१०) रोगी को ३ से ४ लीटर पानी पीना जरूरी है। लेकिन भोजन के साथ पानी नहीं पीना चाहिये। क्योंकि इससे जठर रस की उत्पत्ति में बाधा पडती है।

११) एक बढिया  उपाय यह भी है कि भोजन सोने से २-३ घन्टे पहिले  कर लें।






१२)  मामूली गरम जल मे एक नींबू निचोडकर पीने से बदहजमी दूर होती है।







१३)  पेट में वायु बनने की शिकायत होने पर  भोजन के बाद १५० ग्राम दही  में दो ग्राम अजवायन और आधा ग्राम काला नमक मिलाकर खाने से वायु-गैस मिटती है। एक से दो सप्ताह तक आवश्यकतानुसार दिन के भोजन के पश्चात लें।



१४) दही  के मट्ठे  में काला नमक और भुना जीरा मिलाएँ और हींग का तड़का लगा दें। ऐसा मट्ठा पीने से हर प्रकार के पेट के रोग में लाभ मिलता है।दही ताजा होना चाहिये।

१५) प्राकृतिक चिकित्सा:-
पेडू की गीली पट्टी
लाभ :- पेट के समस्त रोगों,पुरानी पेचिस, बडी आंत में सूजन,,पेट की नयी-पुरानी सूजन,अनिद्रा,बुखार एवं स्त्रियों के गुप्त रोगों की रामबाण चिकित्सा है |इसे रात्रि भोजन के दो घंटे बाद पूरी रात तक लपेटा जा सकता है |
साधन -

१) खद्दर या सूती कपडे की पट्टी इतनी चौड़ी जो पेडू सहित नाभि के तीन अंगुल ऊपर तक आ जाये एवं इतनी लम्बी कि पेडू के तीन-चार लपेट लग सकें |
२) सूती कपडे से दो इंच चौड़ी एवं इतनी ही लम्बी ऊनी पट्टी |
विधि :-
उपर्युक्त पट्टियों की विधि से सूती/खद्दर की पट्टी को भिगोकर,निचोड़कर पेडू से नाभि के तीन अंगुल ऊपर तक लपेट दें ,इसके ऊपर से ऊनी पट्टी इस तरह से लपेट दें कि नीचे वाली गीली पट्टी पूरी तरह से ढक जाये | एक से दो घंटा या सारी रात इसे लपेट कर रखें|

17.6.16

वजन बढ़ाने के उपचार ; Weight gain Tips



 दुबले पतले  लोगों के लिये वजन बढाने के उपचार  

                                                                                                                                  
                                                                                                                                             



      भोजन में पौषक तत्वों की कमी  बनी रहने से लोग आहिस्ता-आहिस्ता  कृष काय हो जाते हैं। अधिक दुबले पतले शरीर  मे शक्ति भी कम हो जाती है। नि:शक्त जन अपनी दिनचर्या सही ढंग से संपन्न करने में थकावट मेहसूस करते है।

   इस लेख में कतिपय ऐसे उपचारों की चर्चा की जाएगी जिनसे आप अपने शरीर का वजन बढा सकते हैं|








प्लान करें वेट गेन शेड्यूल

सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आपके बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई के हिसाब से यह जानने कि कोशिश करें कि आपकी लंबाई और उम्र के हिसाब से आपका वजन क‌ितना होना चाहिए।
बीएमआई आप इंटरनेट पर भी जोड़ सकते हैं या फिर खुद ही इसका हिसाब लगाएं। इसका फार्मूला है-
बीएमआई = वजन (किलोग्राम) / (ऊंचाई X ऊंचाई (मीटर में))
आमतौर पर 18.5 से 24.9 तक बीएमआई आदर्श स्थिति है इसलिए वजन बढ़ाने के क्रम में ध्यान रखें कि आप इसके बीच में ही रहें।

डाइट पर दें ध्यान


वजन बढ़ाने का मतलब यह नहीं कि आप जमकर फास्ट फूड या पैटी डाइट पर टूट पड़ें। यहां समझदारी से काम लेना जरूरी है।
थोड़ी-थोड़ी देर पर डाइट लें और अपने भोजन की मात्रा थोड़ी बढ़ाएं। डाइट में कार्बोहाइड्रेट और हेल्दी फैट्स की मात्रा बढ़ाएं। अध‌िक कैलोरी वाली डाइट जैसे रोटियां, रेड मीट, राजमा, सब्जियां, मछली, चिकन, ऑलिव्स और केले जैसे फल आदि की मात्रा बढ़ाएं।
दिन में कम से कम पांच बार थोड़ी-थोड़ी डाइट लें।

कसरत न छोड़ें


वजन बढ़ाने का मतलब यह नहीं कि आप आलस की चादर ओढ़ लें। शरीर को फिट रखने के लिए हर हाल में कसरत जरूरी है।
प्रतिदिन आधा घंटा भी अगर आप कसरत को देंगे तो आपके शरीर का मेटाबॉलिज्म अच्छा होगा, भूख अच्छी तरह लगेगी और आप फिट रहेंगे।
कसरत और हेल्दी डाइट का कांबिनेशन वजन घटाने और बढ़ाने, दोनों के लिए जरूरी है। वेट लिफ्टिंग कसरतें इस मामले में मददगार हैं।

तनाव न लें

वजन सेहतमंद तरीके से बढ़ाना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है जिसका स्ट्रेस लेने से कोई फायदा नहीं है। कसरत और अच्छी डाइट के साथ-साथ रुटीन में आराम का थोड़ा समय निकालें।
सोने और उठने का समय निर्धारित करें जिससे शरीर तेजी से रिकवर होगा। योग और प्राणायाम के जरिए आप तनाव मुक्त होकर अपने शेड्यूल पर कायम रह सकते हैं।

      नाश्ते में बादाम,दूध,मक्खन घी  का पर्याप्त मात्रा में उपयोग करने से आप तंदुरस्त रहेंगे और वजन भी बढेगा।





   भोजन में प्रोटीन की मात्रा बढाएं। दालों में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है। अडा,मछली,मीट भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं।बादाम,काजू का नियमित सेवन करें।


     बीमारी की अवस्था में,बीमारी के बाद,यात्रा से  या मेहनत  से थके होने पर,,सुबह और शाम के वक्त और उपवास  की अवस्था में अपने पार्टनर से शारीरिक संबंध बनाना हानिकारक है।







   अधिक केलोरी वाला भोजन लेते रहें।
















   च्यवनप्राश वजन बढाने की और स्वस्थ रहने की मशहूर आयुर्वेदिक औषधि है। सुबह -शाम दूध के साथ सेवन करते रहें।


    आयुर्वेद में अश्वगंधा और सतावरी  के उपयोग से वजन बढाने का उल्लेख मिलता है।३-३  ग्राम  दोनों रोज सुबह लं का चूर्ण दूध के साथ प्रयोग करें। वसंतकुसुमाकर रस भी काफ़ी असरदार  दवा है।






   रोज सुबह ३-४ किलोमीटर  घूमने का नियम बनाएं। ताजा हवा भी मिलेगी और आपका मेटाबोलिस्म  भी ठीक रह्र्गा।












 भोजन खूब अच्छी तरह से चबा चबा कर खाना चाहिये। दांत का काम आंत पर डालना उचित नहीं है।


दोनों वक्त शोच निवृत्ति की आदत डालें।


 ५० ग्राम किश मिश रात को पानी में भिगोदे  सुबह भली प्रकार चबा चबा कर खाएं।  २-३ माह के प्रयोग से वजन बढेगा।




 नारियल का दूध - यह आहार तेलों का समृद्ध स्रोत है और भोजन के लिए अच्छा तथा स्वादिस्ट जायके के लिए जाना जाता है। नारियल के दूध में भोजन पकाने से खाने में कैलोरी बढ़ेगी। जिससे आपके वजन में वृधि होगी।


 मलाई- मिल्क क्रीम में आवश्यकता से ज्यादा फैटी एसिड होता है। और ज्यादातर खाद्य उत्पादों की तुलना में अधिक कैलोरी की मात्रा होती है। मिल्क क्रीम को पास्ता और सलाद के साथ खाने से वजन तेजी से बढ़ेगा।

अखरोट - अखरोट में आवश्यक मोनोअनसेचुरेटेड फैट होता है जो स्वस्थ कैलोरी को उच्च मात्रा में प्रदान करता है। रोज़ 20 ग्राम अखरोट खाने से वजन तेजी से प्राप्त होगा।

केला- तुरंत वजन बढाना हो तो केला खाइये। रोज़ दो या दो से अधिक केले खाने से आपका पाचन तंत्र भी अच्छा रहेगा।


 ब्राउन राइस - ब्राउन राइस कार्बोहाइड्रेट और फाइबर की एक स्वस्थ खुराक का स्रोत है। भूरे रंग के चावल कार्बोहाइड्रेट का भंडार है इसलिए नियमित रूप से इसे खाने से वजन तेजी से हासिल होगा।


आलू-  आलू कार्बोहाइड्रेट और काम्प्लेक्स शुगर का अच्छा स्त्रोत है। ये ज्यादा खाने से शरीर में फैट की मात्रा बढ़ जाती है।

 बीन्स : जो लोग शाकाहारी है और नॉनवेज नहीं खाते उनके लिए बीन्स से अच्छा कोई विकल्प नहीं है। बीन्स के एक कटोरी में 300 कैलोरी होती है। यह सिर्फ वजन बढ़ने में ही मदत नहीं करता बल्कि पौष्टिक भी होता है।

 मक्खन : मक्खन में सबसे ज्यादा कैलोरी पाई जाती है। मक्खन खाने के स्वाद को सिर्फ बढ़ाता ही नहीं बल्कि वजन बढ़ाने में भी मदद करता है।

13.6.16

केसर रोग मे उपयोगी नुस्खे Domestic drugs useful in cancer

                                                                                                                
केन्सर एक बीमारी नही है,अपितु लगभग १०० रोगों के सम्मिलित समूह का नाम है। इस रोग मे शरीर की कोषिकाओं (Cells) की अनियन्त्रित वृद्धि होने लगती है  और ये अनियमित आकार की कोषिकाएं अपने मूल पैदाईशी स्थान से शरीर के अन्य दूरस्थ भागों को अभिगमन करने लगती हैं। अगर इन  केन्सर सेल्स को समय रहते रोका नहीं गया तो रोगी की मृत्यु  हो जाती है।

    यह रोग वैसे तो हर उम्र में हो सकता है लेकिन आंकडों पर नजर डाली जावे तो ६० प्रतिशत केन्सर रोगी ६५  साल से ज्यादा आयु के लोग होते हैं।
    
      जब जांच कराने के बाद मालूम हो जाये कि केन्सर अस्तित्व में आ चुका है तो रोगी को केन्सर पैदा करने वाली चीजों से परहेज करना चाहिये-  १..तम्बाखू. २..ज्यादा शराब पीना.  ३..अधिक कैफ़िन तत्व युक्त पदार्थ जैसे चाय और काफ़ी. ४..एक्स-रे.  ५..सिर के उपर से गुजरने वाली अतिशक्ति, हाई पावर विद्युत लाईन   ६..भोजन के पदार्थों में रंग मिश्रित करना।

     केन्सर रोगी के शरीर में विजातीय याने अनावश्यक जहरीले द्रव्यों का संग्रह मौजूद रहता है और इस रोग के इलाज में पहली जरूरत इन विजातीय पदार्थों को शरीर से बाहर निकालना है।विजातीय पदार्थों के शरीर से निष्कासन होने से हमारा प्रतिरक्षा तन्त्र मजबूत होता है और शरीर में केन्सर से लडने की ताकत पैदा होती है।

         जहरीले विजातीय पदार्थों के निष्कासन के लिये क्या करें?


१) अदरक का रस दो चम्मच दिन में दो मर्तबा पीयें।
२) अंग्रेजी औषधी Inositol  ८०० एम जी प्रतिदिन लेते रहें।
३) अंग्रेजी दवा ग्लुटाथिओन १५० एम.जी रोज लें।
४) लिपोईक एसिड ६०० एम जी प्रतिदिन लें।
उक्त  दवाएं किसी जानकार चिकित्सक के मार्ग दर्शन में लेना फ़ायदेमंद रहेगा।
केन्सर के ट्युमर का पोषण  बंद करने के लिये निम्न उपचार करें--



१) हल्दी











२)  लहसुन
३)फ़ोलिक एसिड
 ४)अलसी का तेल १५ ग्राम प्रतिदिन
 ५  सेलेनिअम ४०० एम जी  प्रतिदिन
 ६)विटामिन   ई  ८०० एम जी रोज।

        केन्सर से लडने के लिये हम क्या खाएं?

                   अंकुरित गेहूं याने जुवारे २० ग्राम  पीसकर रस बनाकर प्रतिदिन पीयें। इससे नया खून बनेगा और केन्सर से लडने की ताकत बढेगी।





लहसुन और प्याज प्रचुर मात्रा में सेवन करना केन्सर रोग में हितकारी उपाय है।




पत्तेदार हरी सब्जीयां,लाल मिर्च, अंगूर बैर,गाजर इन भोजन पदार्थों में एन्टि ओक्सीडेन्ट तत्व होते हैं जो केन्सर के विरुद्ध लडाई में मददगार होते हैं।

      इनके अलावा केन्सर रोगी को निम्न पदार्थों का प्रचुर मात्रा में सेवन करने की सलाह दी जाती है--फ़ूल गोभी. पत्तागोभी, ब्रोकली,  आलू, मक्का, भूरे चावल ,मछली,अखरोट और सेव फ़ल।
      सबसे जरूरी बात ये है कि केंसर  के सेल्स याने कोषिकाओं का  पोषण बंद करना चाहिये जिससे केन्सर की कोषिकाएं भूखे मरकर समाप्त होने लगे।  इसके  लिये निम्न बातों पर ध्यान दें---
१)  शकर एसा पदार्थ है जिससे केन्सर को पोषण मिलता है। अत: शकर का उपयोग करना छोड दें, इसकी जगह थौडी मात्रा में शहद या  गुड ले सकते हैं।
  २)  दूध मे श्लेष्मा होती है।  आंतों में मौजूद श्लेष्मा केन्सर कोषिकाओं का पोषण करती है अत: दूध और दूध से बने पदार्थ उपयोग में न लाएं।  हां,सोयाबीन का दूध ले सकते हैं। इस  उपचार से केन्सर के सेल्स भूखों मरेंगे और समाप्त होने लगेंगे।
 ३) केन्सर सेल्स अम्लीय वातावरण में तेजी से पनपते हैं। मंसाहार अम्लीय गुण वाला होता है। इसलिये केन्सर रोगी मांसाहार छोड दें।
४)  काफ़ी,चाय,चाकलेट में ज्यादा मात्रा में केफ़िन तत्व होता है जो केन्सर को बढावा देता है,अत: इनका त्याग आवश्यक है।
५)  केन्सर सेल्स का आवरण मजबूत प्रोटीन से बना होता है  जब मांसाहार से परहेज करेंगे तो शरीर मे अधिक मात्रा में एन्जाईम उत्पादन होंगे और ये एन्जाईम केन्सर सेल्स की दीवारो पर चोट कर उन्हें नष्ट करेंगे।और ये एन्जाईम हमारे शरीर के स्वस्थ्य सेल्स को ताकत देंगे  जिससे वे केन्सर के सेल्स को नष्ट कर सकेंगे।
६)  केन्सर के सेल्स भरपूर आक्सीजन युक्त वातावरण में जीवित नहीं रह सकते। अत: शरीर में      आक्सीजन का प्रवाह बढाने के लिये योग और  प्राणायाम करने लाभदायक रहेंगे।
   कच्चा भोजन फ़ायदेमंद है-

      केन्सर रोगी के भोजन में ८० प्रतिशत सब्जियों का रस जरूरी है। अनाज के बीज,सूखे मेवे और कुछ फ़ल भी ले सकते हैं।  बाकी २० प्रतिशत भोजन पकाया हुआ या उबाला हुआ लेना चाहिये। यह केन्सर रोगी का आदर्श भोजन विधान है।


  ताजा सब्जीयों में ऐसे एन्जाईम होते हैं जो शीघ्र ही  हमारी कोशिकाओं की  गराई तक पहुंच जाते हैं  जिससे स्वस्थ सेल्स का निर्माण होता है  । सभी तरह की सब्जीयों का  रस पियें और कच्ची सब्जियां भी भरपूर तादाद में इस्तेमाल करें।








      एक ताजा शोध में यह प्रमाणित हुआ है कि तुलसी और पुदिने में ऐसे रासायनिक तत्व काफ़ी मात्रा में पाये जाते हैं जिनमें केन्सर उत्पादक फ़्री रेडिकल्स से लडने की शक्ति मौजूद रहती है।

   करेला का जूस केंसर में लाभदायक है--

वैसे तो करेला मधुमेह रोग में बहुत बढ़िया असर दिखाता है और शुगर का लेविल शीघ्र ही सामान्य हो जाता है, लेकिन नए अनुसंधान में यह साबित हुआ है कि इससे केंसर रोग की रोक-थाम की जा सकती है| करेले में एक रसायन पाया गया है जो केंसर युक्त कोशिकाओं को ग्लूकोस इस्तेमाल करने से रोकता है| केंसर की कोशिकाएं ग्लूकोज नहीं मिलने से बेदम होने लगती है और धीरे धीरे नष्ट हो जाती हैं| वैज्ञानिकों ने पाया है कि करेले का जूस सिर,गले और आंतों के केंसर में उपकारी है|   

वैसे तो केन्सर का कारगर ईलाज जैसी कोई बात अभी तक इस दुनियां में नहीं है लेकिन मेरे बताये कुदरती उपचारों से केन्सर रोगी की जीवन रेखा में ईजाफ़ा होगा और क्वालिटी आफ़ लाईफ़ में भी सुधार होगा।मन मजबूत बनाकर निर्देशों के मुताबिक अपनी जीवनशैली निर्धारित करें।